स्तम्भ
-
आज की राजनीति में आदर्शवाद ख्वाब है
डॉ.धीरज फुलमती सिंह मुबंई: भारत मे लॉकडाउन में थोड़ी सी ढील मिलते ही भाजपा ने बिहार में चुनाव प्रचार का…
Read More » -
उपनिवेशवाद दो ढाई सौ वर्षों का संक्षिप्त विवरण
के.एन. गोविन्दाचार्य भाग 5 स्तम्भ: 1945 मे द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ। भारी जनहानि हुई थी। मारक अस्त्रों मे एटम…
Read More » -
उपनिवेशवाद दो ढाई सौ वर्षों का संक्षिप्त विवरण
के.एन. गोविन्दाचार्य भाग 4 1965 से 80 के कालखंड मे सत्ताबल की परत चढ़ी। 1980 से 95 के बीच बाहुबल…
Read More » -
चल लौट के आ जा रे मेरे मीत
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: बुन्देलखण्ड में कहावत है- ‘आन गाॅव की चिपड़ी सें घर की सूखी साजी’ अर्थात् दूसरे गाॅव…
Read More » -
उपनिवेशवाद दो ढाई सौ वर्षों का संक्षिप्त विवरण
भाग 3 के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: अंग्रेजों ने 1750 से 1945 तक भारत की समाजव्यवस्था, अर्थव्यवस्था, राज्यव्यवस्था और सांस्कृतिक, धार्मिक व्यवस्था…
Read More » -
तेरे हौसले से गजब हो गया
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: अभी जबकि हम शुरू में पिछड़ जाने के बाद तेजी से कोरोना की रेस में आगे…
Read More » -
उपनिवेशवाद दो ढाई सौ वर्षों का संक्षिप्त विवरण
के.एन. गोविन्दाचार्य भाग 2 इसी सिलसिले में 1780 से 1802 तक चले Land Resettlement Act और 1860-1890 में जनगणना मे…
Read More » -
उपनिवेशवाद : दो ढाई सौ वर्षों का संक्षिप्त विवरण
भाग 1 के.एन. गोविन्दाचार्य उपनिवेशवाद परिणामतः साम्राज्यवाद की कहानी पिछले लगभग 500 वर्षों की है। 1490 से 1500 के बीच…
Read More » -
कृषि उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य अध्यादेश 2020
कन्हैया पांडे अब किसान अपनी पसंद की जगह बेचेगा अपना उत्पाद नई दिल्ली: कहते हैं असली भारत गांवों में बसता…
Read More » -
उपनिवेशवाद का इतिहास-कुछ पहलू
के.एन. गोविन्दाचार्य विश्व में ई. 1500 से प्रारंभ हुए उपनिवेशवाद की अमानुषिकता के लक्षण थे : लूट, हथियारवाद, शोषण, अत्याचार,…
Read More » -
मास्क लगाये लेकिन समझदारी भी बरतें
डॉ.धीरज फुलमती सिंह मुबंई: बुधवार 27 मई को सुबह से एक बडे अस्पताल जाना हुआ। उस अस्पताल में कोरोना मरीजों…
Read More » -
स्वदेशी, आत्मनिर्भरता की ऐतिहासिक भारतीय पृष्ठभूमि
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: पिछले दो, ढाई सौ वर्ष पहले भी भारत दुनिया मे आर्थिक दृष्टि से सबसे धनी समाज रहा…
Read More » -
जवाबदेही की मांग करता अनलॉक
अहमद रज़ा नई दिल्ली: लॉकडाउन के चार फेज़ के बाद अब भारत अनलॉक की तरफ बढ़ रहा है। वर्तमान नियमों…
Read More » -
जब गंगा-जमुना में उठ रही कर्तव्य और रिश्ते के बीच की भंवर में फंसे दिलीप कुमार और उनके सगे भाई नासिर ख़ान
मनीष ओझा दिल रोता है चेहरा हँसता रहता हैकैसा कैसा फ़र्ज़ निभाना होता है।। मुबंई: अख्तर आज़ाद की ये शायरी…
Read More » -
लॉकडाउन पर दोहरी मार
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : जिन लोगों ने यह मान रखा था कि लाॅकडाउन थोड़े समय का कैदखाना है, वे उसकी…
Read More » -
फसल के “न्यूनतम समर्थन मूल्य” निर्धारण में “कृषि लागत और मूल्य आयोग” की भूमिका
प्रशांत कुमार पुरुषोत्तम पटना: राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने कहा था कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है। भारत की…
Read More » -
इंसानी बस्ती केवल इंसानों की???
विनय सिंह स्तम्भ: आज केरल में एक बड़ी संवेदनहीन घटना घटित हुई। केरल के कुछ स्थानीय लोगो ने एक गर्भवती…
Read More » -
तेवर और जरूरत के अनुरूप हो, स्वदेशी आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर: के एन गोविंदाचार्य
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: इस बीच आत्मनिर्भरता शब्द उभरा है। शब्द दोहराने से ज्यादा महत्वपूर्ण है अर्थ को जीना। अर्थ को…
Read More » -
आज एक हिटलर की जरूरत है?
डॉ.धीरज फुलमती सिंह मुबंई: आजकल हिटलर का नाम सुनकर पढ़े लिखे बौद्धिक लोग उसे हत्यारा/ आतंकी पता नहीं क्या-क्या कह…
Read More » -
ना और हां के बीच के लम्बे फासले
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी में एक बड़े पते की बात कही। कोरोना…
Read More » -
दो शहरों वाला देश
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : पिछले पॉच दिनों की भारी अशांति ने कोरोना से पहले से कराह रहे अमेरिका को हिलाकर…
Read More » -
कोरोना के बारे में कुछ चिंतनीय पहलु: के.एन गोविंदाचार्य
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: आजकल कोरोना के जन्मस्थान को लेकर भारी विवाद है। रूस, चीन, अमेरिका के ऊपर उँगलियाँ उठ रही है।…
Read More » -
अभी न जाओ छोड़कर
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : सरकार ने एक साथ एक ही सांस में दो घोषणाएं की हैं। उसने कहा है…
Read More » -
ये जो पॉलिटिक्स है
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: जो कभी भी कुछ भी करा दे, उसे पॅालिटिक्स कहते हैं। पूरी दुनिया के अच्छे-अच्छे, जाने-माने…
Read More » -
शब्दों को बार-बार दोहराना एक बात है, शब्द के अर्थ को जीने की बात ही कुछ और है
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: हमारे अभिभावक आदरणीय यशवंत राव केलकर जी “नानी तीन बार हँसी” आख्यान सुनाते थे। बात गहरी थी। उस…
Read More » -
बूढ़ी ट्रेनें…
ज्ञानेन्द्र कुमार शुक्ला तो हमारी ट्रेनें उम्रदराज होने के चलते भूल गयीं अपनी राह डेढ़ सौ साल से ज्यादा उम्रदराज…
Read More » -
छुट भईया नेता या समाजसेवी कैसे बने?
डॉ.धीरज फुलमती सिंह व्यंग मुबंई: छुट भईया नेता और समाज सेवक इंसानो की यह वह नश्ल है,जो हर गली,नुक्कड,चौराहे पर…
Read More » -
अजीत जोगी-बहुत कठिन है उन-सा होना
प्रो.संजय द्विवेदी भोपाल : जिद, जिजीविषा, जीवटता और जीवंतता एक साथ किसी एक आदमी में देखनी हो तो आपको अजीत…
Read More »