स्तम्भ
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अभी न जाओ छोड़कर
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : सरकार ने एक साथ एक ही सांस में दो घोषणाएं की हैं। उसने कहा है…
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ये जो पॉलिटिक्स है
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: जो कभी भी कुछ भी करा दे, उसे पॅालिटिक्स कहते हैं। पूरी दुनिया के अच्छे-अच्छे, जाने-माने…
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शब्दों को बार-बार दोहराना एक बात है, शब्द के अर्थ को जीने की बात ही कुछ और है
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: हमारे अभिभावक आदरणीय यशवंत राव केलकर जी “नानी तीन बार हँसी” आख्यान सुनाते थे। बात गहरी थी। उस…
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बूढ़ी ट्रेनें…
ज्ञानेन्द्र कुमार शुक्ला तो हमारी ट्रेनें उम्रदराज होने के चलते भूल गयीं अपनी राह डेढ़ सौ साल से ज्यादा उम्रदराज…
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छुट भईया नेता या समाजसेवी कैसे बने?
डॉ.धीरज फुलमती सिंह व्यंग मुबंई: छुट भईया नेता और समाज सेवक इंसानो की यह वह नश्ल है,जो हर गली,नुक्कड,चौराहे पर…
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अजीत जोगी-बहुत कठिन है उन-सा होना
प्रो.संजय द्विवेदी भोपाल : जिद, जिजीविषा, जीवटता और जीवंतता एक साथ किसी एक आदमी में देखनी हो तो आपको अजीत…
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हिन्दी पत्रकारिता के उस पार
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ : हिन्दी पत्रकारिता के अंग्रेजीकरण ने अब कई नए आयाम खोज निकाले हैं। हिन्दी हेडलाइन्स के…
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बड़ा बेटा
अजीत सिंह स्वयं के जीवन से जुड़ा मार्मिक संस्मरण स्तम्भ: बड़ी घबराहट हो रही है, मन बडा बेचैन है, चक्कर…
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लो मैं तो साहब बन गया
ज्ञानेन्द्र शर्मा स्तम्भ: कुछ समय पहले यह तय हुआ था कि राज्यपाल को ‘महामहिम’ नहीं बोला जाएगा। अब राज्यपाल को…
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राहत पैकेज का झुनझुना
डॉ. धीरज फुलमती सिंह मुम्बई: मै तो तुम्हारे लिए चाँद तारे तोड लाऊगा। अधिकतर आशिक, अपनी माशुका को ऐसा कह…
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महात्मा गांधी की दृष्टि में स्वातंत्र्यवीर सावरकर
वीर सावरकर जयंती प्रसंग लोकेन्द्र सिंह भोपाल : “सावरकर बंधुओं की प्रतिभा का उपयोग जन-कल्याण के लिए होना चाहिए। अगर…
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गोयल की रेल कहीं छूट न जाय
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: मोदी है तो मुमकिन है, कहते हैं उनके समर्थक। पर अब लोग यह भी कहने लगे…
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बीस अब तुम इक्कीस तक इंतजार करो
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: अब से कोई 23 साल पहले आजादी की स्वर्ण जयंती के अवसर पर संसद के दोनों…
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लक्ष्य सिद्धि के लिये बुद्धि की तुलना में संवेदनशील मन का विशेष महत्व है
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के अभिभावकों में से एक आदरणीय यशवन्तराव केलकर जी के घर अनौपचारिक चायपान…
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बड़ी मेहरबानी, करम
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: दो महीने के लॉकडाउन ने कई कमाल किए हैं और जिन कुछ लोगों को घर में…
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ए गाँव के लफंगे-लतख़ोर…
सुमन सिंह स्तम्भ: “हरे ये पिंटुआ! हमनियों के देबे पेप्सिया की कुल ओहि लड़िकवन में बाँट देबे…आँय।” होठों को अजब…
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भारत राजसत्ता से संचालित समाज नहीं है
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: भारत यूरोप की तरह शर्तों पर आधारित (SOCIAL CONTRACT THEORY) समाज नही है। भारत संबंधो, पारिवारिक भावना…
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यहां तो हर शख्स मुँह छुपाए है
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: लॉकडाउन का चौथा अध्याय अब खत्म होने को एक हफ्ता बचा है। अबकी बार लग रहा…
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मजदूर ही क्यों, आप क्यों नहीं
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: दिल खुश करने वाली एक तस्वीर आज अखबारों में छपी। वायुसेना के हैलीकाप्टर के केबिन में…
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हिंदी फिल्मों में हिंदी भाषा का कंफ्यूजन
मनीष ओझा निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।विविध कला शिक्षा…
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गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबों
प्रसंगवश जातिवादः उत्तर प्रदेश के एक साहित्यकार-अधिकारी सूचना निदेशक के रूप में बिहार के दौरे पर गए। वहाॅ मुख्यमंत्री से…
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एक शपथ मेरी भी…
पूनम चंद्रवंशी नई दिल्ली: अब मैं आपको क्या बता सकती हूँ? बहुत खूबसूरत शब्दों में और अपने दिल से सभी…
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प्रवासी मजदूरों के प्रति सभी स्तरों पर संवेदनशील रवैया जरुरी: के.एन गोविंदाचार्य
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: 45 करोड़ मे से 40 करोड़ प्रदेशों के भीतर और कम से कम 5 करोड़ देश से…
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रक्त प्लाज्मा थेरेपी की खोज, कोविड-19 का उपचार!
प्रशांत कुमार पुरुषोत्तम नई दिल्ली: सर्वविदित है कि करोना काल का दौर विपत्ति का दौर है। यह तब और कठिन…
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बात बसों की ही तो है बस
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: करीब दो महीने के कर्णभेदी मौन के बाद राजनीतिक खिलाड़ी अपने चिरपरिचित खेल पर वापस लौट…
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देश के लिए मिसाल हैं ये प्रशासनिक अधिकारी
सुधांशु दिवेदी लखनऊ: यूँ तो तो साक्षात्कार और भेंटवार्ताओं में लोग यही बताते हैं कि वे समाज परिवर्तन और सेवा…
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भारत के अहिंसक समृद्धि का रहस्य
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: आज से 200 वर्ष पूर्व तक भी भारत सर्वाधिक समृद्ध देश रहा है। यहाँ के सबसे गरीब इंसान,…
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प्रवासियों ग़ैरत मंद बनो
डा़. धीरज फुलमती सिंह मुम्बई: हिदुस्तान को आज़ाद हुए 70 साल से ज्यादा हो गये है। इस दौरान भारत के…
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