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79,459 करोड़ की ऐतिहासिक परियोजना कल राष्ट्र को समर्पित करेंगे पीएम मोदी, देश को मिलेगी पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-पेट्रोकेमिकल मेगा सौगात

जयपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को देश की पहली ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स राष्ट्र को समर्पित करेंगे। अत्याधुनिक तकनीक से लैस यह मेगा परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोकेमिकल आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

करीब 79,459 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित इस परियोजना को हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में स्थापित किया गया है। 9 एमएमटीपीए क्षमता वाली यह रिफाइनरी रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन को एकीकृत करने वाली देश की पहली ग्रीनफील्ड परियोजना है।

रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन का अनूठा संगम

यह कॉम्प्लेक्स 2.4 एमएमटीपीए पेट्रोकेमिकल क्षमता के साथ विकसित किया गया है। यहां कच्चे तेल से विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन शुरू हो चुका है। रिफाइनरी को राजस्थान में उत्पादित क्रूड ऑयल और आयातित कच्चे तेल के मिश्रण को संसाधित करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 है, जो इसे दुनिया की अत्याधुनिक और उच्च दक्षता वाली रिफाइनरियों की श्रेणी में शामिल करता है। साथ ही कुल उत्पादन में पेट्रोकेमिकल उत्पादों की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत से अधिक है।

ऊर्जा सुरक्षा से लेकर औद्योगिक विकास तक मिलेगा बड़ा लाभ

यह परियोजना देश की ईंधन उत्पादन क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। इसके जरिए प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल पुर्जे और कृषि आधारित उत्पादों से जुड़े उद्योगों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉम्प्लेक्स भविष्य में पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक पार्कों के विकास के लिए आधारभूत उद्योग के रूप में काम करेगा, जिससे अनेक डाउनस्ट्रीम और सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण बनी परियोजना

राजस्थान की रेतीली भूमि पर निर्मित यह परियोजना इंजीनियरिंग कौशल का भी अनूठा उदाहरण मानी जा रही है। इसके निर्माण के दौरान करीब 1.5 करोड़ घन मीटर मिट्टी हटाई गई, जो गीजा के पिरामिड के निर्माण में उपयोग हुई मिट्टी से कई गुना अधिक बताई जा रही है।

परियोजना में लगभग 16 लाख घन मीटर कंक्रीट और करीब 3 लाख मीट्रिक टन स्टील का उपयोग किया गया है। इसके अलावा 28 हजार किलोमीटर लंबी केबल बिछाई गई है। रिफाइनरी परिसर में स्थापित 125 मीटर ऊंचा कोक डोम भी इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।

हजारों लोगों को मिला रोजगार

रिफाइनरी परियोजना ने रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। निर्माण कार्य के दौरान लगभग 35 हजार श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला, जबकि सहायक और संबद्ध क्षेत्रों में करीब एक लाख अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा हुए।

‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मिलेगी मजबूती

सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना के राष्ट्र को समर्पित होने के बाद भारत की ऊर्जा अवसंरचना को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही यह परियोजना पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास, निवेश और औद्योगिक विस्तार का नया अध्याय लिखने में अहम भूमिका निभाएगी।

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