स्तम्भ
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ए गाँव के लफंगे-लतख़ोर…
सुमन सिंह स्तम्भ: “हरे ये पिंटुआ! हमनियों के देबे पेप्सिया की कुल ओहि लड़िकवन में बाँट देबे…आँय।” होठों को अजब…
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भारत राजसत्ता से संचालित समाज नहीं है
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: भारत यूरोप की तरह शर्तों पर आधारित (SOCIAL CONTRACT THEORY) समाज नही है। भारत संबंधो, पारिवारिक भावना…
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यहां तो हर शख्स मुँह छुपाए है
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: लॉकडाउन का चौथा अध्याय अब खत्म होने को एक हफ्ता बचा है। अबकी बार लग रहा…
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मजदूर ही क्यों, आप क्यों नहीं
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: दिल खुश करने वाली एक तस्वीर आज अखबारों में छपी। वायुसेना के हैलीकाप्टर के केबिन में…
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हिंदी फिल्मों में हिंदी भाषा का कंफ्यूजन
मनीष ओझा निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।विविध कला शिक्षा…
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गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबों
प्रसंगवश जातिवादः उत्तर प्रदेश के एक साहित्यकार-अधिकारी सूचना निदेशक के रूप में बिहार के दौरे पर गए। वहाॅ मुख्यमंत्री से…
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एक शपथ मेरी भी…
पूनम चंद्रवंशी नई दिल्ली: अब मैं आपको क्या बता सकती हूँ? बहुत खूबसूरत शब्दों में और अपने दिल से सभी…
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प्रवासी मजदूरों के प्रति सभी स्तरों पर संवेदनशील रवैया जरुरी: के.एन गोविंदाचार्य
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: 45 करोड़ मे से 40 करोड़ प्रदेशों के भीतर और कम से कम 5 करोड़ देश से…
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रक्त प्लाज्मा थेरेपी की खोज, कोविड-19 का उपचार!
प्रशांत कुमार पुरुषोत्तम नई दिल्ली: सर्वविदित है कि करोना काल का दौर विपत्ति का दौर है। यह तब और कठिन…
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बात बसों की ही तो है बस
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: करीब दो महीने के कर्णभेदी मौन के बाद राजनीतिक खिलाड़ी अपने चिरपरिचित खेल पर वापस लौट…
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देश के लिए मिसाल हैं ये प्रशासनिक अधिकारी
सुधांशु दिवेदी लखनऊ: यूँ तो तो साक्षात्कार और भेंटवार्ताओं में लोग यही बताते हैं कि वे समाज परिवर्तन और सेवा…
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भारत के अहिंसक समृद्धि का रहस्य
के.एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: आज से 200 वर्ष पूर्व तक भी भारत सर्वाधिक समृद्ध देश रहा है। यहाँ के सबसे गरीब इंसान,…
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प्रवासियों ग़ैरत मंद बनो
डा़. धीरज फुलमती सिंह मुम्बई: हिदुस्तान को आज़ाद हुए 70 साल से ज्यादा हो गये है। इस दौरान भारत के…
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लाचार गरीबों पर सियासत
अशोक पाण्डेय लखनऊ: पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश में सियासी नौटंकी चल रही है। प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक…
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तुम्ही से दिल का हाल छुपाएँ, तुम्ही को हाल बताएं
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: घूस यानी रिश्वत से हमारी बहुत पुरानी जान पहचान है। हमें इससे नफरत तो है लेकिन…
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राष्ट्रभक्ति केवल भावना नहीं, जीवन व्यवहार भी है
के. एन. गोविन्दाचार्य स्तम्भ: सन् 1983 से संघ परिवार में हममें से कइयों के अभिभावक श्री यशवंत राव केलकर ने बताया…
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घर में जो रहोगे काम बन जाएगा
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: एक और लाॅकडाउन जल्दी ही दस्तक दे सकता है और यह नए किस्म का लाॅकडाउन होगा…
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प्रवासी मजदूर: देश की कमजोरी या देश की ताकत?
के. एन. गोविंदाचार्य स्तम्भ: “जंजीर की मजबूती उसकी मजबूत कड़ियों से नहीं बल्कि उसकी सबसे कमजोर कड़ी से ही आंकी…
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‘देशप्रेम की साकार और व्यावहारिक अभिव्यक्ति है स्वदेशी’
लोकेन्द्र सिंह भोपाल : मुझे आज तक एक बात समझ नहीं आई कि कुछ लोगों को स्वदेशी जैसे अनुकरणीय, उदात्त…
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संकट में है पत्रकारिता की पवित्रता
प्रो.संजय द्विवदी कसौटी पर है मीडिया की नैतिकता और समझदारी भोपाल : भारतीय मीडिया अपने पारंपरिक अधिष्ठान में भले ही…
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देश के दुखों की नदी में तैरते सवाल
प्रो. संजय द्विवेदी कोरोना के बहाने आइए अपने असल संकटों पर विचार करें भोपाल : कोरोना संकट के बहाने भारत…
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अनिल दवे : परम्परा के पथ का आधुनिक नायक
संजय द्विवेदी अनिल माधव दवे की पुण्यतिथि पर विशेष भोपाल : पर्यावरण, जल, जीवन और जंगल के सवाल भी किसी…
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नया धारावाहिक: ‘लाॅकडाउन’
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: तो आइए हम आपको लाॅकडाउन नाम के धारावाहिक के चौथे भाग पर ले चलते हैं। चौथे…
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आत्मनिर्भर अभियान के तहत 20 लाख करोड़ में से 40 हजार करोड मनरेगा को आवंटित
कन्हैया पांडे सरकार की पांचवें दौर की घोषणाएं नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोविड़-19 महामारी से लड़ने के लिए…
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“श्रीकृष्ण की पावन नगरी मथुरा में श्रीराम चर्चा का वो अनूठा और मार्मिक प्रसंग”
राम महेश मिश्र बात बीती शताब्दी के आख़िरी दशक की है। साल रहा होगा कोई 1991/92 का। हम सपत्नीक कृष्णनगरी…
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चार्ली चैपलिन भी थे वी.शांताराम के प्रशंसक
विमल अनुराग भारत की पहली द्विभाषिक फिल्म और पहली रंगीन फिल्म के लिए प्रयास करने वाले नवाचारी निर्देशक वी.शांताराम की…
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तुम्हें बुरी सांस से बचाए भगवान!
ज्ञानेन्द्र शर्मा प्रसंगवश स्तम्भ: माताएं एक जमाने से अपने लाडलों को बुरी नजर से बचाने के लिए माथे पर काला…
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स्वदेशी की दिशा में बढ़ने का आज का तकाजा
के. एन. गोविंदाचार्य स्तम्भ: प्रवासी मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के स्वरोजगारियों की घर-वापसी की अंतहीन व्यथा-कथा, उनका मौन विलाप पिछले…
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