छत्तीसगढ़राज्य

सुशासन तिहार के बाद एक्शन मोड में सरकार! CM तक पहुंचीं शिकायतें, छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर तबादलों के संकेत

रायपुर: छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के समापन के बाद अब सरकार जनता से मिले फीडबैक और शिकायतों के आधार पर प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा में जुट गई है। प्रदेशभर से बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों और शिकायतों के बाद शासन स्तर पर जवाबदेही तय करने की कवायद तेज हो गई है। इसी के साथ राज्य में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल और तबादलों की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

सुशासन तिहार के दौरान राज्यभर में आयोजित शिविरों में कुल 6 लाख 43 हजार 334 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें 4 लाख 17 हजार 111 मांग संबंधी और 26 हजार 223 शिकायतों से जुड़े आवेदन शामिल हैं। शिकायतों की बड़ी संख्या ने शासन का ध्यान खींचा है और अब इन मामलों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है।

इन विभागों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें

जानकारी के अनुसार राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खाद्य और सामाजिक कल्याण विभागों से संबंधित शिकायतें सबसे अधिक सामने आई हैं। कई आवेदनों में अधिकारियों और कर्मचारियों पर लापरवाही, भ्रष्टाचार, समय पर कार्य नहीं करने और आम लोगों से संवाद की कमी जैसे आरोप लगाए गए हैं।

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जा रही है और विभिन्न जिलों से विस्तृत रिपोर्ट भी मंगाई गई है।

मुख्यमंत्री स्तर पर हो रही समीक्षा

सूत्रों के अनुसार सुशासन तिहार से मिले फीडबैक की समीक्षा उच्च स्तर पर की जा रही है। जिन जिलों और विभागों में शिकायतों की संख्या अधिक है, वहां विशेष रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। अधिकारियों के कार्य प्रदर्शन, जन शिकायतों की स्थिति और समाधान की गति का भी मूल्यांकन किया जा रहा है।

इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि किन अधिकारियों के खिलाफ बार-बार शिकायतें दर्ज हुई हैं और किन क्षेत्रों में जन असंतोष अधिक देखने को मिला है।

जवाबदेही तय करने की तैयारी

सरकार केवल शिकायतों के निपटारे तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उन कारणों की भी जांच कर रही है जिनकी वजह से लोगों को बार-बार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी उद्देश्य से प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

माना जा रहा है कि जिन जिलों में शिकायतों का स्तर अधिक रहा है, वहां अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रदर्शन का विशेष मूल्यांकन किया जाएगा।

तबादले और जिम्मेदारियों में बदलाव संभव

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि खराब प्रदर्शन, लगातार शिकायतों और जन असंतोष के आधार पर कई अधिकारियों के तबादले किए जा सकते हैं। इसके अलावा कुछ विभागों में जिम्मेदारियों में बदलाव और आवश्यक होने पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।

सरकार के संकेतों से स्पष्ट है कि सुशासन तिहार को केवल जनसुनवाई अभियान के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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