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लखनऊ अग्निकांड: बुलडोजर कार्रवाई पर आया 26.14 लाख रुपये का खर्च, भवन मालिक को भेजा जाएगा रिकवरी नोटिस

लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित उस अवैध व्यावसायिक भवन को ध्वस्त करने में 26 लाख 14 हजार 212 रुपये का खर्च आया है, जहां 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड में 15 बच्चों की मौत हो गई थी। अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने इस पूरी राशि की वसूली भवन मालिक से करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जल्द ही रिकवरी नोटिस जारी किया जाएगा।

एलडीए के अनुसार, उपाध्यक्ष के निर्देश पर अभियंत्रण, विद्युत-यांत्रिक, सुरक्षा और जनसंपर्क अनुभाग ने ध्वस्तीकरण अभियान में हुए कुल खर्च का आकलन किया है। सभी मदों को जोड़ने के बाद कुल व्यय 26,14,212 रुपये निर्धारित किया गया है।

ध्वस्तीकरण का पूरा खर्च भवन मालिक से वसूला जाएगा

प्रवर्तन जोन-4 के जोनल अधिकारी माधवेश कुमार ने बताया कि अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित इस अवैध व्यावसायिक भवन का निर्माण वीरेन्द्र शुक्ला, सुरेन्द्र शुक्ला और अन्य लोगों द्वारा कराया गया था। इसी इमारत में संचालित कोचिंग और एनिमेशन सेंटर में आग लगने से 15 बच्चों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य छात्र झुलस गए थे। कुछ बच्चों ने जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगाई थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हुए थे।

उन्होंने बताया कि ध्वस्तीकरण, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक प्रबंधों पर आने वाला पूरा खर्च पहले प्राधिकरण ने वहन किया था। अब नियमानुसार यह राशि भवन स्वामी से वसूली जाएगी।

नियम पहले से लागू, नोटिस के बाद होगी कानूनी कार्रवाई

एलडीए अधिकारियों के मुताबिक, अवैध निर्माण को ध्वस्त करने में आने वाले खर्च की वसूली संबंधित पक्ष से किए जाने का प्रावधान पहले से लागू है। ध्वस्तीकरण आदेश के दौरान भवन पर चस्पा किए गए नोटिस में भी इसका उल्लेख किया गया था। यदि भवन मालिक निर्धारित समय में राशि जमा नहीं करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अग्निकांड के बाद कई अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई

इस हादसे के बाद एलडीए ने अपने कई अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की थी। कुछ अधिकारियों का तबादला किया गया, जबकि कई कर्मचारियों और इंजीनियरों के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू की गई।

फायर एनओसी की अनिवार्यता पर व्यापारियों ने जताई आपत्ति

इधर, उद्योग व्यापार मंडल ने गैर-आवासीय भवनों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य किए जाने के एलडीए के फैसले पर आपत्ति जताई है। संगठन के अध्यक्ष अमरनाथ अग्रवाल और महामंत्री योगेंद्र सिंह का कहना है कि मौजूदा स्वरूप में यह व्यवस्था लागू होने पर शहर के हजारों पुराने व्यापारिक प्रतिष्ठान प्रभावित हो सकते हैं।

व्यापार मंडल ने कहा कि वह किसी भी प्रकार की सुरक्षा संबंधी लापरवाही का समर्थन नहीं करता, लेकिन पुराने बाजारों में दशकों पहले बने भवनों पर वर्तमान तकनीकी मानकों को लागू करना व्यवहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

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