अन्तर्राष्ट्रीय

भारत-EU के बीच दिसंबर में हो सकती है ऐतिहासिक FTA डील, फरवरी तक लागू करने का लक्ष्य; निर्यातकों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अंतिम चरण में पहुंचता नजर आ रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिए हैं कि दोनों पक्षों के बीच बहुप्रतीक्षित समझौते पर दिसंबर 2026 तक हस्ताक्षर हो सकते हैं, जबकि इसे अगले वर्ष फरवरी-मार्च तक लागू करने की तैयारी की जा रही है।

मुंबई में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि यह समझौता भारत के लिए वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा और इससे भारतीय उद्योगों को यूरोपीय बाजारों तक व्यापक पहुंच मिलेगी।

दुनिया की सबसे बड़ी व्यापारिक साझेदारियों में शामिल होगी डील

भारत और 27 देशों के समूह यूरोपीय संघ के बीच इस वर्ष फरवरी में वार्ताओं के निष्कर्ष की घोषणा की गई थी। व्यापार जगत में इस समझौते को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों के लिए यूरोप का विशाल बाजार पहले की तुलना में कहीं अधिक सुलभ हो जाएगा।

पीयूष गोयल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक क्षमता और विकास की गति को देखते हुए दुनिया की नजरें भारत पर टिकी हैं। ऐसे में यह समझौता देश के व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा।

93 फीसदी भारतीय निर्यात को मिल सकती है ड्यूटी-फ्री पहुंच

प्रस्तावित समझौते के तहत भारत से यूरोपीय संघ को होने वाले करीब 93 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने की संभावना है। इससे भारतीय निर्यातकों, विनिर्माण क्षेत्र और घरेलू उद्योगों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क बाधाएं कम होने से भारतीय उत्पाद यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

यूरोपीय उत्पादों पर भी घट सकती है आयात शुल्क दर

समझौते के तहत यूरोपीय संघ से भारत आने वाले कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी की संभावना भी जताई जा रही है। इसमें लग्जरी वाहन और अन्य चुनिंदा वस्तुएं शामिल हो सकती हैं। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को भी कुछ उत्पाद अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत साझेदारी

आर्थिक दृष्टि से भारत और यूरोपीय संघ की साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। दोनों मिलकर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई मानी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निवेश, तकनीक, विनिर्माण और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।

अमेरिका और कनाडा के साथ भी तेज हुई व्यापारिक बातचीत

पीयूष गोयल ने बताया कि भारत समानांतर रूप से अमेरिका और कनाडा के साथ भी व्यापार समझौतों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस सप्ताह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर भारत दौरे पर आने वाले हैं, जहां द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर अहम वार्ताएं होंगी।

इसके अलावा जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा की ओर से भी भारत के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की इच्छा व्यक्त की गई है। भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते को लेकर मई 2026 में दूसरे दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते को देश के निर्यात, निवेश और औद्योगिक विकास के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। यदि तय समयसीमा के भीतर यह लागू होता है तो भारतीय कंपनियों को दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।

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