
नई दिल्ली: नीदरलैंड्स आज दुनिया के सबसे लंबे कद वाले लोगों के लिए जाना जाता है। यहां पुरुषों की औसत लंबाई करीब 182.5 सेंटीमीटर यानी लगभग छह फुट और महिलाओं की औसत लंबाई करीब 169 सेंटीमीटर बताई जाती है। पुरुषों और महिलाओं को मिलाकर औसत कद करीब 176 सेंटीमीटर के आसपास बैठता है। हालांकि, अलग-अलग अध्ययनों, आयु वर्गों और माप के वर्षों के अनुसार ये आंकड़े बदल सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि डच लोग हमेशा से इतने लंबे नहीं थे। करीब डेढ़ सदी पहले नीदरलैंड्स के लोग यूरोप के अपेक्षाकृत छोटे कद वाली आबादी में गिने जाते थे। इसके बाद कुछ पीढ़ियों में उनका औसत कद तेजी से बढ़ा। इसके पीछे खानपान, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, स्वच्छता, जीवन स्तर, सामाजिक परिस्थितियां और आनुवंशिकी जैसे कई कारणों का संयुक्त प्रभाव माना जाता है।
कभी यूरोप में छोटे कद वाले लोगों में गिने जाते थे डच
आज लंबे कद के लिए मशहूर डच नागरिक 19वीं सदी में यूरोप के अपेक्षाकृत छोटे कद वाले लोगों में शामिल थे। ऐतिहासिक अध्ययनों के अनुसार, 19वीं सदी के मध्य में नीदरलैंड्स के पुरुषों की औसत लंबाई वर्तमान समय की तुलना में काफी कम थी।
इसके बाद करीब 150 वर्षों के दौरान तस्वीर बदलती गई। बेहतर पोषण, साफ-सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं और बच्चों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियों ने नई पीढ़ियों की शारीरिक वृद्धि में योगदान दिया। कुछ ऐतिहासिक तुलनाओं में डच पुरुषों की औसत लंबाई में करीब 20 सेंटीमीटर तक की बढ़ोतरी का उल्लेख मिलता है। हालांकि, इतने लंबे समय के आंकड़ों की तुलना करते समय अलग-अलग दौर के नमूनों और मापने के तरीकों को ध्यान में रखना जरूरी है।
दूध-पनीर ही नहीं, पूरे खानपान ने निभाई भूमिका
नीदरलैंड्स की खाद्य संस्कृति में दूध, पनीर और दूसरे डेयरी उत्पादों की महत्वपूर्ण जगह है। इनसे शरीर को प्रोटीन और कैल्शियम मिलता है, जो हड्डियों के विकास और मजबूती के लिए जरूरी पोषक तत्व हैं।
बचपन और किशोरावस्था में पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व मिलने से शरीर अपनी आनुवंशिक क्षमता के अनुसार विकसित हो सकता है। वहीं, लंबे समय तक कुपोषण और बार-बार होने वाली बीमारियां बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती हैं।
हालांकि, सिर्फ दूध या पनीर को डच लोगों के लंबे कद का कारण मानना सही नहीं होगा। संतुलित आहार, पर्याप्त ऊर्जा, प्रोटीन के अन्य स्रोत और बचपन के दौरान बेहतर स्वास्थ्य भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं ने भी बढ़ाया औसत कद
लोगों की औसत लंबाई सिर्फ खानपान से तय नहीं होती। गर्भावस्था के दौरान मां का स्वास्थ्य, जन्म के बाद बच्चों को मिलने वाला पोषण, संक्रमण से बचाव और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी शारीरिक विकास को प्रभावित करते हैं।
नीदरलैंड्स में समय के साथ जीवन स्तर में सुधार, बेहतर स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार ने बच्चों के विकास के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया। पर्याप्त भोजन और गंभीर बीमारियों से बचाव मिलने पर बच्चों के शरीर को अपनी विकास क्षमता हासिल करने का बेहतर मौका मिलता है।
इसलिए डच लोगों की औसत लंबाई में ऐतिहासिक वृद्धि को किसी एक खाद्य पदार्थ के बजाय व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलावों के संदर्भ में समझना ज्यादा उचित है।
क्या लंबे कद वाले लोगों के ज्यादा बच्चे होने से भी बढ़ी लंबाई?
डच लोगों की लंबाई को लेकर आनुवंशिकी और जीवनसाथी चुनने के तरीकों पर भी शोध हुए हैं। कद एक जटिल आनुवंशिक विशेषता है, जिस पर कई जीनों के साथ-साथ पर्यावरण का भी प्रभाव पड़ता है।
कुछ अध्ययनों में संकेत मिला है कि लंबे कद वाले डच पुरुषों के अधिक बच्चे होने की प्रवृत्ति ने आबादी की औसत लंबाई बढ़ाने में योगदान दिया हो सकता है। यदि लंबे कद से जुड़े आनुवंशिक गुण पीढ़ियों तक आगे बढ़ते हैं, तो समय के साथ आबादी के औसत कद पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी डच लोग लंबे कद वाले साथी को ही प्राथमिकता देते हैं या केवल इसी वजह से पूरा देश लंबा हो गया। आनुवंशिकी, पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक परिस्थितियों के संयुक्त प्रभाव को समझना जरूरी है।
लंबे लोग तो घर और बिस्तर में भी मांगते हैं ज्यादा जगह
लंबे कद वाले लोगों के लिए रोजमर्रा की सुविधाओं का आकार भी महत्वपूर्ण होता है। दरवाजों की ऊंचाई, बिस्तरों की लंबाई, सार्वजनिक परिवहन में बैठने की जगह और साइकिल के ढांचे का आकार उनकी जरूरतों के मुताबिक होना सुविधाजनक रहता है।
नीदरलैंड्स में साइकिल परिवहन का प्रमुख साधन है और अलग-अलग कद वाले लोगों के लिए विभिन्न आकारों की साइकिलें उपलब्ध हैं। लंबे लोगों के लिए अतिरिक्त लंबाई वाले गद्दे और बिस्तर भी उपयोगी हो सकते हैं।
हालांकि, यह दावा करना सही नहीं होगा कि देश के सभी शहरों में दरवाजे, बसें, ट्रेनें और होटल खास तौर पर लंबे लोगों के लिए बनाए गए हैं। सुविधाओं का आकार भवन, परिवहन व्यवस्था और उत्पाद के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होता है।
अब क्यों धीमी पड़ गई लोगों की लंबाई बढ़ने की रफ्तार?
नीदरलैंड्स की नई पीढ़ियों की लंबाई को लेकर हुए अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि औसत कद बढ़ने की रफ्तार धीमी हुई है। कुछ युवा पीढ़ियों में औसत लंबाई स्थिर रहने या मामूली कमी के संकेत भी मिले हैं।
इसके संभावित कारणों में पोषण और जीवनशैली में बदलाव, आबादी की आनुवंशिक संरचना में परिवर्तन और प्रवासन के कारण बढ़ी विविधता शामिल हो सकती है। हालांकि, इनमें से किसी एक कारण को निर्णायक मानने के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं। इसी तरह, बिना पर्याप्त साक्ष्य के प्रसंस्कृत भोजन को इसका मुख्य कारण बताना भी उचित नहीं होगा।
नीदरलैंड्स की लंबाई की कहानी में छिपा है बड़ा सबक
नीदरलैंड्स की कहानी बताती है कि किसी आबादी का औसत कद सिर्फ आनुवंशिक विरासत से तय नहीं होता। बचपन में पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, जीवन स्तर और कई पीढ़ियों में होने वाले आनुवंशिक बदलाव मिलकर इसमें योगदान देते हैं।
यानी लंबे कद के लिए मशहूर नीदरलैंड्स की कहानी सिर्फ दूध, पनीर या लंबे माता-पिता की कहानी नहीं है। यह इस बात का उदाहरण भी है कि बेहतर सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य परिस्थितियां किसी आबादी के शारीरिक विकास को लंबे समय में किस तरह प्रभावित कर सकती हैं।



