पाकिस्तान पर IMF का बढ़ा दबाव, 7 अरब डॉलर के प्रोग्राम के लिए संसद से कराने होंगे 174 बदलाव; कई सेक्टरों पर पड़ेगा असर

इस्लामाबाद: आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के 7 अरब डॉलर के कार्यक्रम की अगली समीक्षा से पहले कई कानूनी और नीतिगत बदलावों की तैयारी चल रही है। पाकिस्तान के वित्त सचिव इमदादुल्लाह बोसल ने नेशनल असेंबली की वित्त एवं राजस्व संबंधी स्थायी समिति को बताया कि IMF की ओर से करीब 174 विधायी संशोधनों की मांग की गई है। इन प्रस्तावों को संसद की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा, हालांकि इन्हें पारित करने का अंतिम अधिकार संसद के पास ही रहेगा।
इन बदलावों का दायरा केवल वित्तीय क्षेत्र तक सीमित नहीं है। वित्तीय प्रशासन, सरकारी कंपनियों का संचालन, विदेशी मुद्रा और रेमिटेंस, जलवायु सुधार तथा स्थानीय मुद्रा बाजार समेत कई क्षेत्रों में बदलाव प्रस्तावित हैं। पाकिस्तान में IMF के 7 अरब डॉलर के एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) की चौथी समीक्षा और 1.4 अरब डॉलर की रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) की तीसरी समीक्षा के लिए IMF मिशन की प्रक्रिया शुरू हो रही है।
संसद की मंजूरी के बिना आगे नहीं बढ़ेंगे बदलाव
पाकिस्तान सरकार इन संशोधनों को तैयार कर संसद के सामने पेश करने की प्रक्रिया में है। वित्त सचिव ने स्पष्ट किया कि बदलावों की मांग IMF की ओर से की गई है, लेकिन उन्हें मंजूरी देना संसद का अधिकार है। इसलिए सरकार को इन प्रस्तावों को निर्धारित विधायी प्रक्रिया से आगे बढ़ाना होगा।
सरकारी कंपनियों और सॉवरेन वेल्थ फंड पर भी जोर
IMF के साथ बातचीत में सॉवरेन वेल्थ फंड (SWF) से जुड़े कानून में बदलाव भी अहम मुद्दा है। इस फंड से संबंधित सरकारी कंपनियों के प्रशासन, वित्तीय रिपोर्टिंग और निगरानी व्यवस्था को व्यापक सरकारी उपक्रमों पर लागू नियमों के अनुरूप करने पर चर्चा हो रही है।
IMF इससे पहले भी पाकिस्तान से SWF के संचालन में बेहतर गवर्नेंस और वित्तीय सुरक्षा उपाय लागू करने को कह चुका है। सरकारी उपक्रमों में सुधार भी IMF कार्यक्रम का लगातार हिस्सा रहा है। फंड के दस्तावेजों में सरकारी कंपनियों की शासन व्यवस्था मजबूत करने, घाटे और वित्तीय जोखिम कम करने तथा जरूरत के अनुसार निजीकरण और पुनर्गठन पर जोर दिया गया है।
चीनी नीति में भी बदलाव की तैयारी
पाकिस्तान की चीनी नीति भी IMF के साथ बातचीत का हिस्सा है। कार्यक्रम के तहत चीनी बाजार में सरकारी हस्तक्षेप कम करने, लाइसेंसिंग और उत्पादन से जुड़े प्रतिबंधों में बदलाव तथा आयात-निर्यात व्यवस्था को ज्यादा उदार बनाने जैसे सुधारों पर जोर दिया गया है।
IMF के हालिया कार्यक्रम दस्तावेज में चीनी बाजार को चरणबद्ध तरीके से उदार बनाने की नीति का उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य बाजार में सरकारी हस्तक्षेप को कम करना और व्यवस्था में सुधार करना है।
रेमिटेंस सब्सिडी पर भी IMF की नजर
विदेशों से पाकिस्तान भेजे जाने वाले पैसे यानी रेमिटेंस को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से दी जाने वाली वित्तीय सहायता भी IMF की समीक्षा में चर्चा का विषय है। IMF ने रेमिटेंस बढ़ाने के लिए महंगी सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं पर निर्भरता कम करने और सीमा-पार भुगतान की लागत समेत अन्य संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया है।
पाकिस्तान सरकार पहले ही रेमिटेंस को प्रोत्साहित करने के लिए दी जाने वाली सब्सिडी में कटौती कर चुकी है। IMF के अनुसार, लंबी अवधि में ऐसा ढांचा तैयार करने का लक्ष्य है जिसमें कम सरकारी वित्तीय सहायता के बावजूद रेमिटेंस प्रवाह को बढ़ावा दिया जा सके।
टैक्स और खर्च से आगे तक फैला है बदलावों का दायरा
174 प्रस्तावित विधायी संशोधनों का दायरा टैक्स और सरकारी खर्च तक सीमित नहीं है। इनमें सरकारी कंपनियों, वित्तीय प्रशासन, कमोडिटी बाजार, विदेशी मुद्रा, रेमिटेंस और व्यापक आर्थिक गवर्नेंस से जुड़े बदलाव भी शामिल हैं।
इन प्रस्तावों को संसद के सामने पेश किए जाने के बाद उनका पारित होना पाकिस्तान की आगामी IMF समीक्षा प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण होगा। फिलहाल सरकार इन बदलावों को विधायी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।



