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कार्डियक अरेस्ट में हर सेकंड कीमती! सही समय पर उठाया गया एक कदम बचा सकता है जान, जानिए जरूरी उपाय

नई दिल्ली: कार्डियक अरेस्ट ऐसी गंभीर चिकित्सा स्थिति है, जिसमें हृदय अचानक काम करना बंद कर देता है और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचना रुक जाता है। यह स्थिति बेहद खतरनाक मानी जाती है क्योंकि इसमें कुछ ही मिनटों की देरी व्यक्ति की जान पर भारी पड़ सकती है।

हाल ही में अभिनेता ऋतुराज सिंह के कार्डियक अरेस्ट से निधन के बाद इस बीमारी को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कार्डियक अरेस्ट अक्सर अचानक आता है और समय पर उपचार नहीं मिलने पर इसके परिणाम घातक हो सकते हैं।

क्या होता है कार्डियक अरेस्ट?

कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब हृदय की धड़कन अचानक रुक जाती है या गंभीर रूप से अनियमित हो जाती है। इसके कारण शरीर और मस्तिष्क तक रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है। ऐसी स्थिति में मरीज कुछ ही सेकंड में बेहोश हो सकता है और सांस लेना भी बंद कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक एक जैसी स्थिति नहीं हैं। हालांकि कई मामलों में हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है।

शुरुआती 5 मिनट क्यों होते हैं सबसे महत्वपूर्ण?

डॉक्टरों का कहना है कि कार्डियक अरेस्ट के बाद शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस दौरान मरीज को उचित प्राथमिक उपचार मिल जाए तो उसके बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाना और मरीज की स्थिति पर नजर रखना बेहद जरूरी होता है।

कार्डियक अरेस्ट के प्रमुख लक्षण

कार्डियक अरेस्ट से पहले या उसके दौरान कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं—

  • व्यक्ति का अचानक बेहोश होकर गिर जाना
  • सांस रुक जाना या सांस लेने में गंभीर परेशानी होना
  • नाड़ी का महसूस न होना
  • सीने में असहजता या दर्द
  • अत्यधिक कमजोरी महसूस होना
  • दिल की धड़कन का अनियमित होना
  • चक्कर आना या अचानक होश खो देना

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ मामलों में कार्डियक अरेस्ट बिना किसी चेतावनी संकेत के भी हो सकता है।

आपके सामने किसी को कार्डियक अरेस्ट आए तो क्या करें?

हृदय रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, सबसे पहले मरीज की प्रतिक्रिया और सांस की जांच करनी चाहिए। यदि व्यक्ति बेहोश है और सांस नहीं ले रहा है, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए संपर्क करना चाहिए।

मरीज को समतल स्थान पर लिटाकर सहायता आने तक उसकी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) दिया जाना कई मामलों में जीवनरक्षक साबित हो सकता है।

किन लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है?

विशेषज्ञों के अनुसार, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान, अत्यधिक तनाव और अनियमित जीवनशैली वाले लोगों में कार्डियक अरेस्ट का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।

कार्डियक अरेस्ट से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

  • नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
  • संतुलित और पौष्टिक आहार लें
  • धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाए रखें
  • नियमित व्यायाम करें
  • रक्तचाप, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें
  • पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करें
  • हृदय संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज न करें

विशेषज्ञों की सलाह

हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कार्डियक अरेस्ट एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसके लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। समय पर पहचान और सही उपचार से कई मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।

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