भारत, जापान को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबील उद्योग बना

नई दिल्ली ( दस्तक डेस्क) : सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि 22 लाख करोड़ रुपये वाला भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग जापान को पीछे छोड़कर विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल उद्योग बन गया है। गडकरी ने विश्वास व्यक्त किया है कि इस वृद्धि के साथ भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग अगले 5 वर्षों में विश्व का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल उद्योग बन जाएगा।
नई दिल्ली में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि देश भर में अच्छी सड़कों के निर्माण से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत में 6 प्रतिशत की कमी आई है। श्री गडकरी ने बताया कि एक्सप्रेसवे और राजमार्गों के निर्माण से न केवल यात्रा का समय कम हुआ है, बल्कि इन राजमार्गों के आसपास के क्षेत्रों के आर्थिक और ढांचागत विकास में भी योगदान मिला है।

गडकरी ने यह भी कहा कि भारतीय किसान हाइड्रोजन और अन्य मूल्यवान ऊर्जा उत्पादों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे इन सामग्रियों के आयात पर भारत की निर्भरता कम हो रही है। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन उत्पादन में वृद्धि के साथ, भारत भविष्य में ऊर्जा निर्यातक देश बन सकता है।
भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग:
भारत का ऑटोमोटिव क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 7.1% और विनिर्माण जीडीपी में 35% का योगदान देता है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल उद्योग बन चुका है। इसका कारोबार लगभग 22 से 24 लाख करोड़ रुपये (लगभग 240 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का है। वाहन उत्पादन वित्तीय वर्ष 2021 के 22.65 मिलियन (2.26 करोड़) यूनिट्स से बढ़कर, वित्तीय वर्ष 2025 में कुल वाहन उत्पादन 31.03 मिलियन (3.1 करोड़) यूनिट्स तक पहुंच गया है। यह उद्योग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से देश में लगभग 3 करोड़ (30 मिलियन) से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है।

भारतीय ऑटो उद्योग सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है। 1991 में इस क्षेत्र को लाइसेंस मुक्त करने और उसके बाद ‘ऑटोमेटिक रूट’ के माध्यम से 100 प्रतिशत एफडीआई के लिए खोलने के साथ इसने एक नई यात्रा शुरू की। तब से लगभग सभी वैश्विक प्रमुख कंपनियों ने भारत में अपनी विनिर्माण सुविधाएं स्थापित की हैं, जिससे वाहनों का उत्पादन 1991-92 में 2 मिलियन से बढ़कर 2023-24 में लगभग 28 मिलियन हो गया है।
भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग का कारोबार लगभग 240 बिलियन अमेरिकी डॉलर (20 लाख करोड़) है, जो देश की अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र में एक बड़ा योगदान है। भारी उद्योग मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, भारतीय ऑटो उद्योग द्वारा लगभग 30 मिलियन नौकरियाँ (प्रत्यक्ष: 4.2 मिलियन और अप्रत्यक्ष: 26.5 मिलियन) सृजित की जाती हैं। भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग ने लगभग 35 बिलियन अमरीकी डॉलर मूल्य के वाहन और ऑटो कलपुर्जे निर्यात किए। वैश्विक स्थिति की दृष्टि से, भारत तिपहिया वाहनों का सबसे बड़ा निर्माता है, विश्व में दोपहिया वाहनों के शीर्ष 2 निर्माताओं में से एक है, यात्री वाहनों के शीर्ष 4 निर्माताओं में से एक है तथा विश्व में वाणिज्यिक वाहनों के शीर्ष 5 निर्माताओं में से एक है।

घरेलू ऑटोमोबाइल उत्पादन में वृद्धिऑटोमोबाइल क्षेत्र भारत के राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 6 प्रतिशत का योगदान देता है। वित्त वर्ष 2023-24 में सभी श्रेणियों में निर्यात 4.5 मिलियन यूनिट तक पहुंच जाएगा, जिसमें 6.72 मिलियन यात्री वाहन और 3.45 मिलियन 2-पहिया वाहन शामिल हैं। स्कोडा ऑटो फ़ॉक्सवैगन इंडिया जैसी वैश्विक ऑटोमोटिव कंपनियां अपने उत्पादन का 30 प्रतिशत निर्यात करती हैं और मारुति सुजुकी सालाना लगभग 2.8 लाख इकाइयां निर्यात करती हैं, जो इस प्रवृत्ति का उदाहरण है।
पिछले चार वर्षों में इस क्षेत्र ने 36 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित किया है, जो वैश्विक ऑटोमोटिव परिदृश्य में भारत की बढ़ती प्रमुखता को दर्शाता है। प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय कम्पनियां पर्याप्त प्रतिबद्धताएं व्यक्त कर रही हैं, हुंडई 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर (33,200 करोड़ रुपये) के विस्तार की योजना बना रही है, जबकि मर्सिडीज-बेंज ने 360 मिलियन अमेरिकी डॉलर (3,000 करोड़ रुपये) का प्लेज दिया है। हाल ही में टोयोटा ने अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए 2.3 बिलियन अमरीकी डॉलर (20,000 करोड़ रुपये) के निवेश की घोषणा की।



