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भारतीय नौसेना को जुलाई में मिलेगा डबल पावर बूस्ट! ‘पनडुब्बी किलर’ समेत दो स्वदेशी वॉरशिप होंगे बेड़े में शामिल

मुंबई: भारतीय नौसेना अगले महीने अपनी ताकत में बड़ा इजाफा करने जा रही है। हाल ही में तीन युद्धपोतों की ऐतिहासिक ट्रिपल कमीशनिंग के बाद अब जुलाई में दो और स्वदेशी युद्धपोत नौसेना के बेड़े का हिस्सा बनने वाले हैं। इनमें अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरि और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता से लैस आईएनएस मालवन शामिल हैं। दोनों युद्धपोतों के शामिल होने से समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

आईएनएस महेंद्रगिरि: दुश्मन को दूर से निशाना बनाने में सक्षम

आईएनएस महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17ए के तहत विकसित नीलगिरी श्रेणी का सातवां और अंतिम युद्धपोत है। इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है और इसे विशाखापट्टनम में नौसेना में शामिल किया जाएगा। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की स्वदेशी निर्माण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी उपकरण और प्रणालियां शामिल हैं।

नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया यह स्टेल्थ फ्रिगेट बहुआयामी युद्ध अभियानों के लिए सक्षम है। इसमें हवाई, सतही और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता मौजूद है। ब्रह्मोस मिसाइल और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली से लैस यह युद्धपोत लंबी दूरी से दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला कर सकता है।

स्टेल्थ तकनीक से लैस, रडार पर पकड़ना मुश्किल

करीब 6700 टन वजनी आईएनएस महेंद्रगिरि को आधुनिक स्टेल्थ तकनीक से तैयार किया गया है, जिससे इसे रडार पर पहचानना बेहद कठिन हो जाता है। युद्धपोत हेलिकॉप्टर संचालन में भी सक्षम है, जिससे समुद्री निगरानी और युद्धक अभियानों की क्षमता और बढ़ जाती है।

आईएनएस मालवन बनेगा तटीय क्षेत्रों का ‘सबमरीन हंटर’

आईएनएस मालवन एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट कार्यक्रम का दूसरा युद्धपोत है। कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित यह पोत लगभग 80 मीटर लंबा और 1100 टन वजनी है। इसकी कमीशनिंग कोच्चि में की जाएगी।

इस युद्धपोत को विशेष रूप से तटीय समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों की निगरानी और उन पर कार्रवाई के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें अत्याधुनिक सोनार, आधुनिक रडार, टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट जैसी उन्नत प्रणालियां लगाई गई हैं।

माइन वॉरफेयर से लेकर समुद्री अभियानों तक होगी अहम भूमिका

आईएनएस मालवन केवल पनडुब्बी रोधी अभियानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह माइन वॉरफेयर और कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन के नाम पर रखे गए इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके कई सिस्टम देश की एमएसएमई इकाइयों द्वारा विकसित किए गए हैं।

हिंद महासागर में बढ़ती चुनौतियों के बीच बड़ा कदम

हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता, पनडुब्बियों की आवाजाही और सामरिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए भारतीय नौसेना लगातार अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रही है। आईएनएस महेंद्रगिरि जैसे स्टेल्थ फ्रिगेट लंबी दूरी की गश्त और बहुआयामी युद्ध अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जबकि आईएनएस मालवन तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी खतरों से निपटने में प्रभावी साबित होगा।

150 से ज्यादा होगी नौसेना के जहाजों की संख्या

भारतीय नौसेना का लक्ष्य वर्ष 2026 के दौरान रिकॉर्ड संख्या में नए जहाजों को सेवा में शामिल करना है। इसके बाद नौसेना के बेड़े में युद्धपोतों और सहायक जहाजों की कुल संख्या 150 से अधिक हो जाएगी। 21 जून को तीन युद्धपोतों की ट्रिपल कमीशनिंग के बाद जुलाई में दो और स्वदेशी युद्धपोतों का शामिल होना नौसेना के आधुनिकीकरण अभियान को नई गति देगा।

समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में आईएनएस महेंद्रगिरि और आईएनएस मालवन को महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इन युद्धपोतों के शामिल होने से आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति और मजबूत होगी।

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