उत्तर प्रदेशराज्यवाराणसी

भारत का भविष्य युवा पीढ़ी के हाथ : कमांडर वी.के. जेटली

RSMT में नवप्रवेशी बीबीए एवं बीसीए छात्रों के अभिमुखीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ

वाराणसी : राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को ध्यान में रखते हुए यूपी कॉलेज परिसर स्थित राजर्षि स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (आरएसएमटी) में नवप्रवेशी बीबीए एवं बीसीए विद्यार्थियों के लिए छात्र अभिमुखीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ अत्यंत उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को शैक्षणिक उत्कृष्टता, नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता, प्रबंधकीय तकनीकी एवं दक्षता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रेरित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती तथा महाविद्यालय के संस्थापक राजर्षि उदय प्रताप सिंह जूदेव के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। संस्थान के निदेशक-प्रभारी प्रो. (डॉ.) अमन गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि आज का विद्यार्थी केवल डिग्री प्राप्त करने वाला छात्र नहीं, बल्कि भविष्य का जिम्मेदार नागरिक, नवप्रवर्तक और समाज का नेतृत्वकर्ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, निरंतर अध्ययन एवं व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि दैनिक जागरण, वाराणसी के इकाई प्रमुख एवं प्रकाशक डॉ. अंकुर चड्ढा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज सूचना की कमी नहीं बल्कि सही सूचना की पहचान सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाचारों का आलोचनात्मक विश्लेषण करने, सकारात्मक सोच विकसित करने तथा डिजिटल जनसंचार माध्यम का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रभावी संचार कौशल किसी भी क्षेत्र में सफलता की पहली सीढ़ी है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कमांडर वी.के. जेटली ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। अनुशासन, उत्कृष्टता, सतत सीखने की प्रवृत्ति तथा राष्ट्र प्रथम की भावना ही युवा शक्ति को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने जीवन का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, समय का सदुपयोग करने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने तथा हर कार्य में उत्कृष्टता प्राप्त करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य कक्षा-कक्षों में बैठी युवा पीढ़ी के हाथों में है और प्रत्येक विद्यार्थी को स्वयं से यह प्रश्न प्रतिदिन पूछना चाहिए कि वह राष्ट्र निर्माण में अपना क्या योगदान दे सकता है। उन्होंने “Achieving the Next Level of Excellence” का संदेश देते हुए विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और निरंतर आत्मविकास की प्रेरणा दी। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कमांडर वी.के. जेटली ने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि केवल मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म लेना ही व्यक्ति की पहचान नहीं है, बल्कि उसके विचार, लक्ष्य और कर्म उसकी वास्तविक ऊँचाई निर्धारित करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में असाधारण सफलता प्राप्त करनी है, तो व्यक्ति को अपनी सोच को मध्यमवर्गीय सीमाओं से ऊपर उठाना होगा। बड़े सपने देखने, ऊँचे लक्ष्य निर्धारित करने, निरंतर सीखने तथा उत्कृष्टता के प्रति समर्पित रहने से ही व्यक्ति अपनी वास्तविक क्षमता को पहचान सकता है।

अपने ओजस्वी उद्बोधन में मुख्य अतिथि कमांडर वी.के. जेटली ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि “सपने वही पूरे करते हैं, जो कठिन रास्तों पर चलने का साहस रखते हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने, असफलताओं से घबराने के बजाय उन्हें सफलता की सीढ़ी बनाने तथा हर दिन स्वयं को कल से बेहतर बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाला भारत केवल डिग्रियों से नहीं, बल्कि साहस, नवाचार, नेतृत्व और कर्मनिष्ठा से बनेगा। यदि युवा अपनी ऊर्जा को सही दिशा दें तो वे न केवल अपना भविष्य बदल सकते हैं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य को भी नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने महाविद्यालयीन जीवन के प्रत्येक दिन को उत्कृष्टता की नई मंजिल प्राप्त करने का अवसर मानें और ऐसा व्यक्तित्व विकसित करें जिस पर परिवार, समाज, संस्थान और राष्ट्र सभी को गर्व हो।

सम्माननीय अतिथि प्रख्यात हिन्दी साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, साहित्य और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और भारतीय संस्कारों का समन्वय ही एक आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि भाषा का प्रदूषण केवल शब्दों का विकार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संवेदनशीलता और विचारशीलता के क्षरण का भी संकेत है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि भाषा की शुद्धता, मर्यादा और संवेदनशीलता को बनाए रखना प्रत्येक शिक्षित नागरिक का दायित्व है। अपने संबोधन में सुप्रसिद्ध साहित्यकार नीरजा माधव ने सनातन संस्कृति के पालन के महत्व को दृष्टांतों के माध्यम से अत्यंत सरल और प्रभावशाली ढंग से समझाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ पद्धति है, जो परिवार, समाज और राष्ट्र को जोड़कर रखती है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि संस्कार, परंपराएँ और नैतिक मूल्य व्यक्ति के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका मानना है कि यदि युवा पीढ़ी सनातन संस्कृति के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाए, तो वह आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ पद्धति है, जो परिवार, समाज और राष्ट्र को जोड़कर रखती है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि संस्कार, परंपराएँ और नैतिक मूल्य व्यक्ति के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका मानना है कि यदि युवा पीढ़ी सनातन संस्कृति के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाए, तो वह आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी सुरक्षित रख सकती है।

विशेष अतिथि पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री नरेंद्र मेहता ने कहा कि तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ संवाद कौशल, टीमवर्क, जनसंपर्क एवं मानवीय व्यवहार आज के प्रतिस्पर्धी युग में सबसे महत्वपूर्ण दक्षताएँ हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वास, विश्वसनीयता एवं सकारात्मक संबंधों के निर्माण पर बल देते हुए कहा कि यही गुण उन्हें सफल प्रबंधक एवं आईटी पेशेवर बनाएंगे। यूपी कॉलेज परिसर के समन्वयक प्रो. मनोज कुमार सिंह ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि राजर्षि उदय प्रताप सिंह जूदेव ने शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, चरित्र निर्माण और समाज सेवा का सशक्त साधन माना था । उन्होंने कहा कि राजर्षि जी के जीवन के मूल्य जैसे राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता, नैतिकता और उत्कृष्टता को अपने आचरण में उतारने का आह्वान करते हुए उन्हें वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भी पूर्णतः प्रासंगिक बताया।

कार्यक्रम में नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट, अनुसंधान गतिविधियों, नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति, क्लब गतिविधियों तथा अनुशासन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी भी प्रदान की गई। बीबीए तथा बीसीए के समन्वयक डॉ. प्रीति सिंह तथा बीसीए के समन्वयक डॉ. सी. पी. सिंह ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, विद्यार्थियों एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. गरिमा आनंद ने किया। इस अवसर पर उदय प्रताप स्वायत्तशासी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डी. के. सिंह, उदय प्रताप इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रमेश प्रताप सिंह, रानी मुरार कुमारी बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. अनीता, तथा उदय प्रताप पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या संगीता कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही।कार्यक्रम में समस्त शिक्षकगण एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। पूरे परिसर में उत्साह, ऊर्जा और नए शैक्षणिक सत्र के प्रति सकारात्मक वातावरण देखने को मिला।

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