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भारत का ‘जादुई तेल’ बदल सकता है वेनेजुएला की किस्मत, दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार को मिल सकता है नया बाजार

नई दिल्ली: दुनिया में सबसे अधिक तेल भंडार की बात आते ही आमतौर पर सऊदी अरब, रूस या अमेरिका का नाम सामने आता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार मौजूद है। अब भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। इसी कड़ी में वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज भारत दौरे पर आ रही हैं, जहां उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात प्रस्तावित है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, डेल्सी रोड्रिगेज 7 जून तक भारत में रहेंगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश, दवा, स्वास्थ्य और परिवहन समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। उनके साथ वेनेजुएला सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी भारत पहुंच रहे हैं।

भारत और वेनेजुएला की जरूरतें कैसे हुईं एक-दूसरे की पूरक

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वेनेजुएला अपने तेल के लिए नए वैश्विक खरीदारों की तलाश में है। वहीं भारत भी कच्चे तेल के आयात स्रोतों को विविध बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, रूस से तेल आपूर्ति से जुड़ी भू-राजनीतिक चुनौतियां और वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितताओं ने भारत को नए विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है। ऐसे में दोनों देशों के हित एक-दूसरे से मेल खाते दिखाई दे रहे हैं।

तेल के भंडार अपार, लेकिन निर्यात में बड़ी चुनौती

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद वह अपने तेल के निर्यात में लंबे समय से कठिनाइयों का सामना कर रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह वहां के कच्चे तेल की प्रकृति है। खाड़ी देशों के अधिकांश तेल की तुलना में वेनेजुएला का तेल बेहद भारी और गाढ़ा होता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तेल कई मामलों में बिटुमेन जैसी विशेषताएं दिखाता है। इसके कारण इसे जमीन से निकालना, पाइपलाइन के माध्यम से बहाना और बंदरगाहों तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। यही वजह है कि विशाल भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला अपने तेल का पूरा व्यावसायिक लाभ नहीं उठा पा रहा है।

यहीं सामने आता है भारत का ‘जादुई तेल’ नेफ्था

वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को परिवहन योग्य बनाने के लिए उसमें नेफ्था मिलाया जाता है। नेफ्था एक हल्का हाइड्रोकार्बन मिश्रण होता है, जो रिफाइनरियों में कच्चे तेल के प्रसंस्करण के दौरान प्राप्त होता है। यह भारी तेल को पतला करने का काम करता है, जिससे उसे पाइपलाइन और टैंकरों के जरिए आसानी से ले जाया जा सके।

नेफ्था की उपलब्धता न होने पर वेनेजुएला के कई तेल क्षेत्रों से उत्पादन और निर्यात करना बेहद कठिन हो सकता है। यही कारण है कि यह उत्पाद वहां की तेल अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा की तरह माना जाता है।

भारत में कितना होता है नेफ्था उत्पादन

भारत की रिफाइनरियां हर साल करीब 18 से 20 मिलियन टन नेफ्था का उत्पादन करती हैं। इसका उपयोग पेट्रोकेमिकल उद्योग, ईंधन मिश्रण और विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है। रिफाइनरियों में इसे आगे प्रोसेस कर उच्च ऑक्टेन पेट्रोल, एथिलीन, प्रोपिलीन और अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

आंकड़ों के अनुसार, एक टन नेफ्था से लगभग 0.7 से 0.9 टन तक पेट्रोल या अन्य हल्के ईंधन उत्पाद प्राप्त किए जा सकते हैं। भारत के कुल पेट्रोलियम उत्पाद उत्पादन में नेफ्था की हिस्सेदारी लगभग 6 से 7 प्रतिशत रहती है।

वेनेजुएला के लिए नेफ्था क्यों है सबसे अहम

सामान्य तौर पर तेल उत्पादक देश दूसरे देशों को कच्चा तेल बेचते हैं, लेकिन वेनेजुएला की स्थिति अलग है। उसे अपना तेल बाजार तक पहुंचाने के लिए पहले दूसरे देशों से नेफ्था जैसे हल्के हाइड्रोकार्बन खरीदने पड़ते हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश अपने तेल को निर्यात योग्य बनाने के लिए बाहरी आपूर्ति पर निर्भर है। यही वजह है कि नेफ्था की नियमित उपलब्धता उसके तेल उद्योग के लिए रणनीतिक महत्व रखती है।

भारत बन सकता है सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार

भारत दुनिया की प्रमुख रिफाइनिंग शक्तियों में शामिल है। गुजरात, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में स्थित बड़ी रिफाइनरियां घरेलू जरूरतों के साथ निर्यात के लिए भी पर्याप्त मात्रा में नेफ्था तैयार करती हैं।

यही कारण है कि भारत वेनेजुएला के लिए केवल एक बड़ा तेल खरीदार नहीं, बल्कि ऐसा साझेदार भी बन सकता है जो उसके तेल उद्योग की सबसे बड़ी समस्या का समाधान उपलब्ध करा सके। यदि भारत से नेफ्था की नियमित आपूर्ति बढ़ती है तो वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल अधिक मात्रा में वैश्विक बाजार तक पहुंच सकता है।

भारत को क्या होगा फायदा

भारत अपनी कुल जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से जोखिम पैदा कर सकती है। वेनेजुएला के साथ मजबूत ऊर्जा संबंध भारत को तेल आपूर्ति का एक अतिरिक्त और महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान कर सकते हैं।

इसके अलावा भारतीय कंपनियों के लिए वेनेजुएला के तेल और गैस क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर भी खुल सकते हैं। यदि भारत नेफ्था का निर्यात बढ़ाता है और बदले में दीर्घकालिक तेल आपूर्ति समझौते हासिल करता है, तो यह दोनों देशों के लिए लाभकारी सौदा साबित हो सकता है।

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