राजनीति

केरल एग्जिट पोल 2026: UDF-LDF में कांटे की टक्कर, बीजेपी बन सकती है ‘किंगमेकर’; आंकड़ों ने बढ़ाई सियासी हलचल

तिरुवनंतपुरम से सामने आए एग्जिट पोल के नतीजों ने केरल की राजनीति को लेकर बेहद दिलचस्प तस्वीर पेश की है। ‘टुडेज चाणक्य’ के सर्वे के मुताबिक राज्य में सत्तारूढ़ एलडीएफ और कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ के बीच बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिल रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी निर्णायक भूमिका में उभर सकती है।

करीबी मुकाबले में UDF को हल्की बढ़त, BJP की अहम भूमिका

एग्जिट पोल के अनुसार यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को 69 सीटें मिल सकती हैं, जबकि लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को 64 सीटों का अनुमान है। वहीं भारतीय जनता पार्टी को 7 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जिससे वह सरकार गठन में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है। अन्य दलों के खाते में कोई सीट जाती नहीं दिख रही है।

अन्य सर्वे में भी अलग-अलग तस्वीर, UDF को बहुमत के संकेत

केरल को लेकर अन्य एजेंसियों के एग्जिट पोल में भी अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। ‘मैटराइज’ के सर्वे में UDF को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना जताई गई है। इस सर्वे के मुताबिक UDF को 70 से 75 सीटें मिल सकती हैं, जबकि LDF को 60 से 65 सीटों पर सिमटने का अनुमान है। वहीं बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को 3 से 5 सीटें और अन्य को 2 से 4 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।

वोट शेयर में भी UDF आगे, LDF से मामूली अंतर

‘मैटराइज’ के आंकड़ों के अनुसार वोट शेयर में भी UDF को बढ़त मिलती दिख रही है। अनुमान है कि UDF को 41.7 प्रतिशत, LDF को 39.5 प्रतिशत, NDA को 13.4 प्रतिशत और अन्य दलों को 5.4 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। यह अंतर भले ही कम हो, लेकिन सत्ता की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।

अन्य राज्यों के रुझानों ने भी बढ़ाई सियासी सरगर्मी

देश के अन्य राज्यों के एग्जिट पोल में भी अलग-अलग संकेत देखने को मिल रहे हैं। पश्चिम बंगाल में बीजेपी के बेहतर प्रदर्शन के संकेत हैं, जबकि असम में लगातार तीसरी बार सरकार बनने की संभावना जताई गई है। वहीं केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले UDF की वापसी के संकेत मिल रहे हैं।

5 राज्यों में हुआ था मतदान, बंगाल में रिकॉर्ड वोटिंग

गौरतलब है कि देश के 5 राज्यों में 9 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच विधानसभा चुनाव कराए गए थे। तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में एक ही चरण में मतदान हुआ, जबकि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में वोट डाले गए। इन चुनावों की खास बात यह रही कि पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया।

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