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विधायक को करंट लगाया, महिलाओं को नग्न घुमाया, जिंदा भी जलाया; जलते मणिपुर की दास्तान

नई दिल्ली : मणिपुर में हिंसा की खौफनाक वारदातें लगातार सामने आ रही है। खासकर कुकी-जोमी आदिवासी समुदाय हिंसा का ज्यादा शिकार हुआ है। कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके सड़क पर परेड कराने की घटना सामने आई थी। एक और घटना में भाजपा विधायक वुंगजागिन वाल्टे पर जानलेवा हमला हुआ। मैतई समुदाय से जुड़े उपद्ववियों ने उन्हें बुरी तरह पीटा और करंट दिया। इतने समय इलाज कराने के बाद अब वह बेड रेस्ट की स्थिति में हैं। 28 मई को उपद्रवियों ने स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी और 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला को उनके घर के साथ जिंदा जलाकर मार डाला। ये कुछ झलकियां हैं, मणिपुर हिंसा की। उधर, संसद में बैठे माननीय पिछले कुछ महीनों से हिंसा की आग में जल रहे मणिपुर का दर्द समझने को तैयार नहीं हैं। हालत ये हैं कि पिछले तीन दिनों से संसद में मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा तक नहीं हो पाई। लगातार चल रहे हंगामे की वजह से तीन दिनों में सदन की कार्यवाही एक घंटे से ज्यादा नहीं चली।

मणिपुर में मई महीने से शुरू हुई सामुदायिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उधर, पिछले तीन दिनों से देश की संसद में बैठे सांसद इस पर फैसला तक नहीं ले पा रहे हैं। तीन दिनों से लगातार हंगामे की वजह से दोनों सदनों की कार्यवाही एक घंटा तक नहीं चल पाई। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि माननीय मणिपुर के मुद्दे पर कितनी गंभीर है?

मणिपुर के भाजपा विधायक वुंगजागिन वाल्टे गहन देखभाल के लिए दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी हालत में अब काफी सुधार हुआ है। उनकी पत्नी माइनु वाल्टे ने उस दर्दनाक घटना को याद करते हुए बताया कि उस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया था। बेटे जोसेफ ने कहा “अगर मेरे पिता, एक विधायक, राज्य में सुरक्षित नहीं थे, तो आप एक आम आदमी की स्थिति की कल्पना कर सकते हैं।” जोसेफ ने यह भी दावा किया कि हमले के पीछे कट्टरपंथी मैतेई समूह आरामबाई तेंगगोल का हाथ था।

अपने पिता पर हुए क्रूर हमले के बारे में बताते हुए, जोसेफ ने खुलासा किया, “उन्होंने मेरे पिता के सिर पर कई बार तेज वस्तुओं से हमला किया। उन्हें चेहरे पर भी हमला किया गया। इससे उनके सिर पर काफी गहरे जख्म हो गए। बुरी तरह बिजली का झटका दिया गया। हालत यह है कि उन्होंने अपनी बोलने की क्षमता और याददाश्त खो दी है। डॉक्टरों का अनुमान है कि उन्हें ठीक होने में दो महीने से अधिक समय लगेगा।”

डर और सुरक्षा की चिंताओं के कारण, परिवार ने स्थिति में सुधार होने तक इंफाल नहीं लौटने का फैसला किया है। जोसेफ ने बताया, “उन्होंने (मैतेई) हमें अलग-थलग कर दिया। हमने खुद को अलग नहीं किया है, लेकिन उन्होंने आदिवासियों को वहां से चले जाने के लिए कहा है।”

यह वीभत्स घटना 4 मई की है। मैतई समुदाय से जुड़ी भीड़ पर कुकी और जोमी आदिवासी महिलाओं को नग्न करके सड़क पर परेड कराने का मामला सामने आया था। यह घटना 4 मई की बताई गई, हालांकि इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर कुछ दिन पहले वायरल हुआ था। भीड़ पर एक महिला के साथ गैंगरेप करने का भी आरोप हैं। एक महिला की उम्र 20 और दूसरी महिला की 40 वर्ष बताई गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि भीड़ ने पहले महिलाओं के परिवार में शामिल दो पुरुष सदस्यों को मार डाला था। महिलाओं ने पुलिस पर उपद्रवियों से मिली-भगत का भी आरोप लगाया।

मणिपुर में घटी एक अन्य वीभत्स घटना ने पूरे देश को झकझोर कर दिया है। यहां स्वतंत्रता सेनानी की 80 वर्षीय पत्नी को उपद्ववियों ने जिंदा जला दिया। घटना मणिपुर की राजधानी इंफाल से 80 किलोमीटर दूर हुई थी। 28 मई को भीड़ ने महिला को उनके घऱ के साथ आग के हवाले कर दिया।

एक तरफ मणिपुर पिछले 80 दिनों से हिंसा की आग में जल रहा है। 4 मई से शुरू हुई हिंसा में जुलाई महीने तक 140 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 50 हजार से ज्यादा लोग राज्य से पलायन कर चुके हैं। दूसरी तरफ दिल्ली की संसद में सदन की कार्यवाही पिछले तीन दिनों से हंगामे की भेंट चढ़ रही है। देश के माननीय सांसद यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि मणिपुर के मुद्दे पर किस नियम से चर्चा की जाए? यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि सियासत को साइड में रखकर मणिपुर के भविष्य के लिए संसद की कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाए। पिछले तीन दिनों में संसद की कार्यवाही एक घंटा भी नहीं चल पाई है।

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