MP UCC: नाम बदलकर धोखा देना होगा मुश्किल! लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, नए प्रावधानों से ‘लव जिहाद’ मामलों पर लगेगी लगाम?

भोपाल: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद राज्य सरकार का मानना है कि पहचान छिपाकर या नाम बदलकर रिश्ते बनाने और कथित धोखाधड़ी के मामलों में कमी आ सकती है। नए प्रावधानों के तहत लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है और पहचान की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे फर्जी पहचान के जरिए रिश्ते बनाने के मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
लिव-इन रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य
यूसीसी की धारा 366 के तहत लिव-इन रिलेशनशिप स्थापित करने के लिए यदि किसी व्यक्ति की सहमति बल या कपट से प्राप्त की जाती है, तो इसके लिए पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही लिव-इन संबंधों का पंजीयन कराना अनिवार्य होगा, जिसमें पहचान का सत्यापन आधिकारिक दस्तावेजों से किया जाएगा।
सरकार का दावा- फर्जी पहचान के मामलों पर लगेगी रोक
राज्य सरकार का मानना है कि पहचान दस्तावेजों के सत्यापन की अनिवार्यता के कारण नाम बदलकर किसी को धोखा देना आसान नहीं रहेगा। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से ऐसे मामलों में कमी आने की संभावना है, जिनमें फर्जी पहचान का आरोप लगाया जाता रहा है।
2021 में लागू हुआ था धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम
इससे पहले वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश सरकार ने धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू किया था, जिसका उद्देश्य कथित अवैध धर्मांतरण और उससे जुड़े मामलों पर रोक लगाना था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस अधिनियम के तहत अब तक 430 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें 58 मामलों में फैसला आ चुका है, जबकि करीब 150 मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं।
भोपाल और इंदौर के मामलों ने खींचा था ध्यान
पिछले वर्ष भोपाल और इंदौर में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिनकी जांच के दौरान पुलिस ने संगठित गिरोह की आशंका जताई थी। भोपाल के एक मामले में जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ आरोपियों पर छात्राओं से दोस्ती करने, यौन शोषण, कथित ब्लैकमेल और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप लगे थे। वहीं इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में भी दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का मामला दर्ज किया गया था।
जांच में सोशल मीडिया प्रोफाइल भी बनी थी जांच का हिस्सा
पुलिस जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि कुछ आरोपी सोशल मीडिया पर कथित तौर पर अलग पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे। वहीं इंदौर में कथित फंडिंग से जुड़े एक मामले में पार्षद अनवर कादरी को भी आरोपी बनाया गया था। इन मामलों की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।



