नेपाल का बड़ा फैसला! भारतीय आमों पर लगी रोक, बाजार में मचा हड़कंप; कीमतें बढ़ने की आशंका से बढ़ी चिंता
नई दिल्ली: भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक संबंधों के बीच एक अहम फैसला सामने आया है। नेपाल सरकार ने भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी है। इस निर्णय के पीछे भारतीय आमों में निर्धारित मानकों से अधिक कीटनाशकों की मौजूदगी और सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्याप्त क्वारंटीन सुविधाओं की कमी को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। वहीं, इस कदम को नेपाल में स्थानीय स्तर पर उत्पादित फलों को बढ़ावा देने की नीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, उन भारतीय आमों के आयात पर विशेष सख्ती बरती गई है जिनमें कीटनाशकों की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई। सरकार का कहना है कि सीमा क्षेत्रों में गुणवत्ता परीक्षण और क्वारंटीन व्यवस्था पर्याप्त रूप से विकसित नहीं होने के कारण यह कदम उठाना पड़ा है।
स्थानीय बाजारों में बढ़ी हलचल
भारतीय आमों के आयात पर रोक के बाद जनकपुरधाम समेत नेपाल के कई प्रमुख बाजारों में स्थानीय आमों की उपलब्धता बढ़ने लगी है। हालांकि, फल कारोबारियों का कहना है कि इस फैसले से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।
नेपाल में गर्मी के मौसम के दौरान आम की मांग काफी अधिक रहती है। ऐसे में व्यापारियों का मानना है कि केवल घरेलू उत्पादन के भरोसे पूरे बाजार की जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं होगा और आने वाले समय में आपूर्ति संबंधी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
व्यापारियों ने जताई महंगाई की आशंका
स्थानीय फल कारोबारियों का कहना है कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना सकारात्मक पहल हो सकती है, लेकिन बिना किसी दीर्घकालिक रणनीति के अचानक आयात पर रोक लगाने से बाजार में असंतुलन की स्थिति बन सकती है। उनका तर्क है कि नेपाल में आम का उत्पादन सीमित अवधि तक ही होता है, जबकि सालभर मांग को पूरा करने में भारतीय आमों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
जनकपुरधाम फल एवं सब्जी व्यापारी संघ से जुड़े कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहा तो बाजार में आम की कमी हो सकती है, जिससे कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
क्वारंटीन व्यवस्था मजबूत करने की मांग
कारोबारियों का मानना है कि पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बजाय सरकार को गुणवत्ता जांच और क्वारंटीन प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उनका सुझाव है कि जांच प्रक्रिया को सख्त बनाकर नियंत्रित तरीके से भारतीय फलों के आयात की अनुमति दी जा सकती है।
व्यापारियों ने यह भी याद दिलाया कि पहले भारतीय केले की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद बाजार में कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी। ऐसे में आमों पर लंबे समय तक रोक रहने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
जापान के फैसले ने भी बढ़ाई भारतीय निर्यातकों की चुनौती
नेपाल के फैसले के बीच हाल ही में जापान ने भी भारतीय आमों की कुछ खेपों पर रोक लगाई थी। जापानी अधिकारियों ने कीट नियंत्रण और वेपर हीट ट्रीटमेंट मानकों का पालन न होने को इसका कारण बताया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए भारतीय फलों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और कीट नियंत्रण संबंधी मानकों को और अधिक मजबूत करना होगा। नेपाल के इस फैसले का असर वहां के बाजार, आम की उपलब्धता, कीमतों और भारत-नेपाल फल व्यापार पर कितना पड़ता है, इस पर आने वाले दिनों में सभी की नजर बनी रहेगी।



