
नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने एंटी-पेपर लीक कानून को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि छात्रों के खिलाफ अब भी प्राथमिकी दर्ज की जा रही हैं, तो नए एंटी-पेपर लीक विधेयक का उद्देश्य क्या है। संसद परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें बिहार और पश्चिम बंगाल में नीट और सीबीएसई परीक्षा से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के बाद छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जानकारी मिली है, हालांकि उन्होंने इसे अपुष्ट बताया।
प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्होंने सुना है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों के खिलाफ अब भी एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो फिर नए कानून का औचित्य क्या है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्र सरकार लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश करने की तैयारी में है।
संसद सत्र से पहले गरमाई सियासत
संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्ष ने छात्र आंदोलन और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया और इस मुद्दे को दोनों सदनों में उठाने की तैयारी की।
लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा की मांग
विपक्षी दलों ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव और राज्यसभा में कामकाज स्थगित करने के नोटिस दिए हैं। उनकी मांग है कि 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा कराई जाए। माना जा रहा है कि यह मुद्दा संसद के दोनों सदनों में प्रमुख राजनीतिक विवाद का केंद्र बन सकता है।
परीक्षा सुधारों के लिए बनी उच्चस्तरीय टास्क फोर्स
इस घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। इस समिति की अध्यक्षता प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि करेंगे। यह घोषणा नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद की गई।
पारदर्शिता बढ़ाने पर रहेगा फोकस
सरकार की ओर से गठित टास्क फोर्स को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और तकनीक आधारित सुधारों के सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए संरचनात्मक बदलावों पर भी अपनी सिफारिशें देगी।



