भारत की सख्ती से घबराया पाकिस्तान, सिंधु जल समझौते पर दुनिया से लगाई गुहार; बोला- पानी रोका तो होंगे गंभीर नतीजे

नई दिल्ली: सिंधु जल समझौते को लेकर भारत के कड़े रुख से पाकिस्तान की चिंता बढ़ती जा रही है। अब पाकिस्तान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाते हुए दूसरे देशों से हस्तक्षेप की अपील की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत के अप्रैल 2025 के फैसले पर चिंता जताते हुए कहा कि सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान की खेती, खाद्य सुरक्षा, बिजली उत्पादन, रोजगार और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
अमेरिका में पाकिस्तानी दूतावास की ओर से आयोजित एक आभासी संगोष्ठी में इशाक डार ने भारत के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अप्रैल 2025 में सिंधु जल समझौते को रोकने का भारत का फैसला एकतरफा था और समझौते में ऐसा करने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने दोनों देशों के बीच बातचीत और सहयोग की जरूरत बताई। साथ ही कहा कि यदि समझौता बहाल नहीं हुआ तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
25 करोड़ से ज्यादा लोगों के पानी पर निर्भर होने का दावा
इशाक डार ने सिंधु नदी को पाकिस्तान की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि 25 करोड़ से अधिक पाकिस्तानी इसके पानी पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि सिंधु नदी तंत्र का महत्व केवल खेती की सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली उत्पादन समेत कई दूसरी आवश्यक जरूरतें भी इससे जुड़ी हैं।
पाकिस्तानी विदेश मंत्री के मुताबिक पानी की सुरक्षा सीधे देश की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है और इसका प्रभाव राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि सिंधु जल विवाद का असर केवल भारत और पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की शांति और स्थिरता पर पड़ सकता है।
पाकिस्तान ने अपने जल संकट का भी दिया हवाला
इशाक डार ने पाकिस्तान में बढ़ते जल संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि देश पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहा है। उनके मुताबिक पिछले दशकों में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता में तेजी से गिरावट आई है। उन्होंने बदलते मौसम, ग्लेशियरों के पिघलने, बाढ़ और लंबे समय तक पड़ने वाले सूखे को बड़ी चुनौतियां बताया।
उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील हालात में देशों के बीच टकराव के बजाय सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। पाकिस्तान इसी तर्क के आधार पर सिंधु जल समझौते के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील
पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में दखल देने की अपील की गई है। इस्लामाबाद का कहना है कि अगर उसे समझौते के तहत मिलने वाला पानी प्रभावित हुआ तो क्षेत्रीय शांति पर इसका असर पड़ सकता है। पाकिस्तान ने सिंधु नदी को दोनों देशों के लोगों के जीवन और रोजगार से जोड़ते हुए इसे विवाद का कारण नहीं बनने देने की बात कही है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने लिया था फैसला
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को रोकने का फैसला किया था। इस हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। सिंधु जल समझौते पर भारत के रुख में अब तक बदलाव नहीं आया है। ऐसे में पानी का मुद्दा दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव के बीच एक अहम विवाद बन गया है।



