राजनीतिराष्ट्रीय

तमिलनाडु में हिरासत में दिव्यांग कैदी की मौत पर सियासी संग्राम, दो महीने पुरानी विजय सरकार विपक्ष के निशाने पर

चेन्नई: तमिलनाडु में मई में सत्ता में आई टीवीके सरकार एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर आ गई है। नागरकोइल में न्यायिक हिरासत के दौरान एक दिव्यांग कैदी की मौत के मामले ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की कार्यशैली और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री थलपति विजय से जवाब मांगा है।

गुटखा बेचने के आरोप में हुई थी गिरफ्तारी

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार नागरकोइल के एथनकाडु निवासी 35 वर्षीय एस. सबरी वर्मन को 9 जुलाई को थेंथमराईकुलम पुलिस ने प्रतिबंधित गुटखा बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना है कि उसकी दुकान से करीब 200 ग्राम प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद बरामद किए गए थे। बाद में न्यायिक हिरासत के दौरान उसकी मौत हो गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद

शुरुआत में मामले को सामान्य मौत बताया गया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद गहरा गया। रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर कोहनी, घुटनों, हाथों और पैरों सहित 19 स्थानों पर चोट के निशान मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।

जेल कर्मचारियों पर कार्रवाई

जानकारी के अनुसार 13 जुलाई की रात सबरी वर्मन और अन्य कैदियों के बीच मारपीट हुई थी। आरोप है कि बीच-बचाव के दौरान जेल स्टाफ ने भी उसके साथ मारपीट की। मामले की जांच के बाद सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर एक मुख्य वार्डन समेत तीन जेल कर्मचारियों को निलंबित कर गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा आठ अन्य कैदियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। डीएमके सांसद कनिमोझी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और सरकार पर मामले को लेकर पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि घटना के कई दिन बाद भी मुख्यमंत्री की ओर से कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया और न ही सरकार का कोई मंत्री पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा।

सीबीआई जांच की उठी मांग

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने घटना को गंभीर बताते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए और सरकार से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की। वहीं पीएमके नेता डॉ. अंबुमणि रामदास ने पूरे मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराने की मांग की है।

Related Articles

Back to top button