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नमो भारत कॉरिडोर पर 110 मेगावॉट के कैप्टिव सोलर प्लांट से बिजली आपूर्ति

कॉरिडोर की 60% बिजली आवश्यकता पूरी करेगी परियोजना, एनसीआरटीसी ने एनएनआरएल के साथ किया एग्रीमेंट।

Ghaziabad News: नमो भारत कॉरिडोर पर 110 मेगा वॉट के कैप्टिव सोलर प्लांट से बिजली की आपूर्ति होगी। नमो भारत कॉरिडोर की 60 प्रतिशत बिजली की जरूरत को परियोजना के माध्यम से पूरा किया जाएगा।
प्लांट को विकसित करेगा एनएनआरएल
एनसीआरटीसी ने एनएनआरएल (एनआईआरएल एनसीआरटीसी रिन्यूएबल्स लिमिटेड) के साथ 110 मेगा वॉट के कैप्टिव सोलर पावर प्लांट के लिए पावर परचेज़ एग्रीमेंट (पीपीए) पर हस्ताक्षर किए। इस प्लांट को एनएनआरएल द्वारा विकसित किया जाएगा। एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल, एनआईआरएल के निदेशक, वित्त एवं सीएमडी डेज़िगनेट, डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य, एनसीआरटीसी की निदेशक, वित्त, नमिता मेहरोत्रा, एनसीआरटीसी के निदेशक, इलेक्ट्रिकल्स एंड रोलिंग स्टॉक, महेंद्र कुमार और एनसीआरटीसी एवं एनआईआरएल के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
अपनी तरह की पहली कैप्टिव सोलर पावर परियोजना
देश के आरआरटीएस और मेट्रो परिवहन प्रणाली के लिए यह अपनी तरह की पहली कैप्टिव सोलर पावर परियोजना है, जो शहरी परिवहन में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण की दिशा में एक बैंचमार्क स्थापित कर रही है। अनुमानित है कि इसके माध्यम से दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की कुल बिजली आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया जा सकेगा। स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा के ज़रिए यह परियोजना कॉरिडोर की दीर्घकालिक संचालन क्षमता को सुदृढ़ करेगी।
सोलर प्लांट की अनुमानित लागत 450 करोड़ रुपये
इस सोलर प्लांट की अनुमानित लागत लगभग 450 करोड़ रुपये है। इसे उत्तर प्रदेश के जालौन शहर में 80:20 डेट-इक्विटी फंडिंग मॉडल के ज़रिए विकसित किया जाएगा। प्लांट में उत्पन्न होने वाली बिजली उत्तर प्रदेश स्टेट ग्रिड के माध्यम से उत्तर प्रदेश और दिल्ली में मौजूद एनसीआरटीसी के रिसीविंग सबस्टेशनों (आरएसएस) तक पहुंचाई जाएगी। जहां से इसे नमो भारत कॉरिडोर में वितरित किया जाएगा। यह परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सोलर एनर्जी पॉलिसी का लाभ उठा रही है। इसे अगले 24 महीनों में परिचालित करने की योजना है।
कुल परिचालन का 35 प्रतिशत हिस्सा बिजली पर खर्च
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के कुल परिचालन व्यय का लगभग 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा बिजली पर खर्च होता है। जो इसके प्रमुख आवर्ती खर्चों में से एक है। इस कैप्टिव सोलर पावर प्लांट के संचालन के बाद बिजली के खर्च में लगभग 25 प्रतिशत की कमी अनुमानित है। साथ ही यह एक स्वच्छ एवं अधिक सतत भविष्य में योगदान देगा। इस समझौते के तहत, एनसीआरटीसी 25 साल की अवधि के लिए तय टैरिफ पर कैप्टिव सोलर पावर प्लांट से उत्पन्न होने वाली बिजली खरीदेगा, जिससे लंबे समय तक बिजली की लागत को स्थिर रखने में मदद मिलेगी और ऊर्जा सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
1.77 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी
आर्थिक लाभ के अलावा, यह परियोजना पर्यावरण लाभ की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। पारंपरिक स्रोतों से मिलने वाली बिजली के एक बड़े भाग की जगह स्वच्छ सौर ऊर्जा का प्रयोग कर, इस परियोजना द्वारा हर साल लगभग 1.77 लाख टन कार्बन ड्राइ आक्साइड उत्सर्जन में कमी अनुमानित है। जिससे स्वच्छ और सतत शहरी परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। इस पहल से नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे हानिकारक प्रदूषकों के उत्सर्जन में भी कमी आने की उम्मीद है, जिससे हवा स्वच्छ होगी और क्षेत्र में सतत शहरी परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।

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