बंगाल में ‘डबल इंजन सरकार’ की तैयारी तेज, वर्षों से अटकी केंद्रीय योजनाओं को जल्द मिलेगा रफ्तार

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन से पहले ही केंद्र सरकार ने राज्य में लंबे समय से लंबित केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र ने विभिन्न मंत्रालयों से उन योजनाओं का पूरा ब्यौरा मांगा है जो पिछले करीब 12 वर्षों से राज्य सरकार के विरोध, प्रशासनिक अड़चनों या देरी के कारण अटकी हुई थीं।
सूत्रों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी गई है। उन्होंने कई मंत्रालयों से पश्चिम बंगाल में लंबित परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालयों ने संबंधित जानकारियां भेजनी भी शुरू कर दी हैं। केंद्र सरकार का लक्ष्य नई सरकार के गठन के तुरंत बाद इन परियोजनाओं को तेज गति से लागू करना है।
केंद्र-राज्य टकराव में वर्षों तक अटकी रहीं योजनाएं
पिछले एक दशक में पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच कई योजनाओं को लेकर लगातार विवाद और टकराव देखने को मिला। कई केंद्रीय योजनाएं राज्य में लागू नहीं की गईं, जबकि कुछ योजनाओं को नाम बदलकर लागू किया गया। कई परियोजनाएं जमीन आवंटन और प्रशासनिक अनुमति के अभाव में वर्षों तक रुकी रहीं।
अब केंद्र सरकार इन योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
आयुष्मान भारत को लेकर फिर बढ़ी चर्चा
सबसे प्रमुख योजनाओं में आयुष्मान भारत योजना शामिल है, जिसे पश्चिम बंगाल सरकार ने लागू करने से इनकार कर दिया था। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलता है।
ममता बनर्जी सरकार का कहना था कि राज्य की ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना अधिक प्रभावी है। इसके अलावा केंद्र की 60:40 फंडिंग व्यवस्था और योजना के स्वरूप को लेकर भी राज्य सरकार ने आपत्ति जताई थी।
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि नई सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत योजना को मंजूरी दी जा सकती है।
किसान सम्मान निधि और मनरेगा पर भी फोकस
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर भी लंबे समय तक केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद बना रहा। राज्य सरकार अपनी ‘कृषक बंधु’ योजना को प्राथमिकता देती रही। हालांकि बाद में योजना आंशिक रूप से लागू की गई, लेकिन लाभार्थियों के सत्यापन को लेकर विवाद जारी रहा।
इसी तरह मनरेगा के फंड को कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद केंद्र ने रोक दिया था। राज्य सरकार ने इसे आर्थिक नाकेबंदी बताया था। अब केंद्र सरकार इस योजना को नए ढांचे के साथ दोबारा गति देने की तैयारी में है।
प्रधानमंत्री आवास योजना और जल जीवन मिशन को मिलेगी रफ्तार
प्रधानमंत्री आवास योजना का नाम बदलकर ‘बांग्ला आवास योजना’ किए जाने और कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद वर्ष 2022 से फंडिंग रुकी हुई थी। अब इस योजना को फिर से सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है।
इसके अलावा जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत रुकी परियोजनाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
शिक्षा और गंगा सफाई परियोजनाओं पर भी जोर
केंद्र सरकार पीएम श्री स्कूल, नई शिक्षा नीति, भाषा नीति और ‘उल्लास’ जैसी योजनाओं को भी राज्य में प्रभावी तरीके से लागू करने की तैयारी कर रही है।
वहीं नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा सफाई से जुड़े कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण वर्षों से लंबित पड़े हैं। केंद्र सरकार कई बार संसद में यह मुद्दा उठा चुकी है कि जमीन न मिलने की वजह से परियोजनाओं में देरी हुई।
अब इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की योजना बनाई जा रही है।
बॉर्डर फेंसिंग और कृषि योजनाओं पर भी ध्यान
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बॉर्डर फेंसिंग को लेकर भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद बना रहा। केंद्र का आरोप था कि आवश्यक जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई। अब इस काम को भी प्राथमिकता में शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जगह राज्य सरकार ने ‘बांग्ला शस्य बीमा’ योजना लागू की थी। राज्य सरकार का दावा था कि यह किसानों के लिए अधिक लाभकारी मॉडल है, जबकि केंद्र इसे राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश बताता रहा।
इसके अलावा मृदा स्वास्थ्य कार्ड और पीएम-प्रणाम जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन की धीमी रफ्तार को लेकर भी केंद्र ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए थे।
‘डबल इंजन सरकार’ के असर पर केंद्र का फोकस
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार की रणनीति साफ है कि लंबे समय से अटकी परियोजनाओं को तेजी से पूरा कर राज्य में ‘डबल इंजन सरकार’ का प्रभाव जमीन पर दिखाया जाए। साथ ही केंद्रीय योजनाओं का दायरा बढ़ाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उनका सीधा लाभ पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।



