उत्तर प्रदेश

‘निकाह-हलाला की आड़ में यौन शोषण बर्दाश्त नहीं’, इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी; आरोपियों को राहत देने से इनकार

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाह-हलाला और बहुविवाह के नाम पर महिला के कथित यौन उत्पीड़न और शोषण से जुड़े गंभीर मामले में आरोपियों को कोई राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत कानूनों की आड़ लेकर किसी भी प्रकार के अपराध, विशेषकर यौन हिंसा को वैध नहीं ठहराया जा सकता।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने आरोपियों की ओर से दाखिल याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि मामला बेहद गंभीर प्रकृति का है और इसकी विस्तृत जांच आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शुरुआती स्तर पर इस प्रकरण को समाप्त नहीं किया जा सकता।

‘संवैधानिक मूल्यों से दूर समाज की तस्वीर पेश करता है मामला’

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला समाज के उस वर्ग की वास्तविकता को सामने लाता है, जो समानता, निजता और व्यक्तिगत सम्मान जैसे संवैधानिक मूल्यों और आदर्शों से काफी दूर है।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्य आत्मा को झकझोर देने वाले हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पर्सनल लॉ का सहारा लेकर किसी भी अपराध को सही नहीं ठहराया जा सकता और भारतीय आपराधिक कानून के सामने ऐसी दलीलें स्वीकार्य नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के इंडिपेंडेंट थॉट बनाम भारत संघ मामले के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ पर्सनल लॉ का हवाला देकर बनाए गए शारीरिक संबंध भी कानून की नजर में अपराध की श्रेणी में आते हैं और उन पर पॉक्सो अधिनियम तथा बलात्कार से संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं।

‘सिर्फ गवाह या निकाह पढ़ाने की भूमिका’ वाली दलील खारिज

अदालत ने आरोपियों की उस दलील को भी स्वीकार नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि कुछ लोगों की भूमिका केवल निकाह पढ़ाने या गवाह बनने तक सीमित थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया पूरा घटनाक्रम एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसकी निष्पक्ष और गहन जांच की आवश्यकता है। अदालत ने याचिकाओं को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया और पूर्व में दिए गए सभी अंतरिम आदेश भी समाप्त कर दिए।

साथ ही पुलिस को मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और व्यापक जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

15 साल की उम्र में हुआ था विवाह, FIR में गंभीर आरोप

अमरोहा जिले के सैदनगली थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, पीड़िता का विवाह उस समय हुआ था जब उसकी उम्र महज 15 वर्ष थी और वह नाबालिग थी।

एफआईआर के मुताबिक, शादी के कुछ समय बाद ही उसके पति ने उसे तलाक दे दिया। इसके बाद दोबारा विवाह कराने का भरोसा देकर उसे बुलंदशहर ले जाया गया, जहां कथित तौर पर उसका जबरन निकाह-हलाला कराया गया।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि हलाला की प्रक्रिया के नाम पर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए। बाद में उसका दोबारा निकाह हुआ और एक बेटी का जन्म भी हुआ, लेकिन उसके बाद भी उत्पीड़न समाप्त नहीं हुआ।

डबल हलाला के नाम पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप

प्राथमिकी के अनुसार, बाद में पति ने एक बार फिर तलाक दे दिया। इसके बाद पुनः विवाह का झांसा देकर पति के भाइयों ने कथित तौर पर डबल हलाला के नाम पर महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

महिला का यह भी आरोप है कि बाद में उसे पता चला कि उसका तीसरा निकाह भी फर्जी तरीके से कराया गया था।

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