
नई दिल्ली: देशभर में आज सोमवती अमावस्या का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। वर्ष 2026 की पहली सोमवती अमावस्या सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। सनातन परंपरा में अमावस्या तिथि को विशेष माना जाता है, वहीं जब यह सोमवार के दिन आती है तो इसे भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत, पूजा-पाठ, दान और पितरों का तर्पण करने से सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन में खुशहाली और पारिवारिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं और पुण्य लाभ की कामना कर रहे हैं।
क्या है सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व?
हिंदू पंचांग के अनुसार सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है। अमावस्या के दिन चंद्रमा का प्रभाव न्यूनतम रहता है, ऐसे में मन की एकाग्रता और आध्यात्मिक साधना के लिए यह तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलने का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है।
आज के शुभ मुहूर्त
धार्मिक कार्यों और पूजा-अर्चना के लिए आज कई शुभ समय बताए गए हैं।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:02 बजे से 4:42 बजे तक रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:54 बजे से 12:49 बजे तक रहेगा।
गोधूलि बेला शाम 7:17 बजे से 7:37 बजे तक मानी गई है।
इन शुभ समयों में पूजा, जप और दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
ऐसे करें सोमवती अमावस्या की पूजा
दिन की शुरुआत स्नान से करें। यदि पवित्र नदी या सरोवर में स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा का संकल्प लें।
भगवान शिव के मंदिर में जाकर या घर के पूजा स्थल पर शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा, सफेद चंदन और अक्षत अर्पित करें। माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।
पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है।
दान-पुण्य का विशेष महत्व
सोमवती अमावस्या पर दान को अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन अन्न, वस्त्र और जरूरत की वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।
चावल, दाल, आटा, घी और गुड़ का दान विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को वस्त्र और फल दान करने की भी परंपरा है।
पितरों को करें तर्पण
इस दिन पितरों के निमित्त जल अर्पित करना और तर्पण करना भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि पितरों को श्रद्धापूर्वक स्मरण कर तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।



