
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। दो सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक नहीं होने के बाद अब सत्ता के गलियारों में अगली बैठक और उसमें होने वाले संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं बढ़ गई हैं। खास बात यह है कि 26 अगस्त की कैबिनेट बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों से कहा था कि अगली बैठक में नए साथी जुड़ेंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि अगली बैठक नए चेहरों के साथ हो सकती है।
26 अगस्त को हुई मंत्रिमंडल बैठक में कोई फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया था। हालांकि, बैठक के दौरान प्रधानमंत्री की ओर से दिए गए संकेत को अब अहम माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि मंत्रिमंडल में बदलाव केवल नए चेहरों को शामिल करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल किया जा सकता है।
कब हो सकता है बड़ा बदलाव?
आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों और सरकार से जुड़ी अहम तारीखों के बीच मंत्रिमंडल फेरबदल की संभावित समयसीमा को लेकर अटकलें तेज हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर तीन से पांच सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा पर रहेंगे। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होना है। भारत इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। वहीं 17 सितंबर से भाजपा का महीने भर चलने वाला सेवा संकल्प अभियान शुरू होना है। ऐसे में छह और सात सितंबर की तारीखों को संभावित बदलाव के लिए अहम माना जा रहा है।
कई मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की तैयारी
सूत्रों के हवाले से चल रही चर्चाओं के मुताबिक मंत्रिमंडल में बड़े स्तर पर विभागों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है। जिन मंत्रियों के पास तीन या चार विभाग हैं, उनमें से कुछ जिम्मेदारियां लेकर नए चेहरों को सौंपी जा सकती हैं। इसके साथ ही एक ऐसा नाम भी सामने आने की संभावना जताई जा रही है, जो राजनीतिक रूप से चौंकाने वाला हो सकता है। मंत्रिमंडल में युवा पीढ़ी के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने की क्षमता को भी अहम कसौटी माना जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय में एक बौद्धिक चेहरे को जिम्मेदारी मिलने की चर्चा भी है।
70 साल से ज्यादा उम्र वाले मंत्रियों पर नजर
मंत्रिमंडल में बदलाव के लिए उम्र भी एक महत्वपूर्ण कसौटी मानी जा रही है। वर्तमान में 70 वर्ष से अधिक आयु के 14 मंत्री हैं। माना जा रहा है कि इस संख्या में कमी की जा सकती है। इनमें से कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि कुछ को राज्यों में महत्वपूर्ण भूमिका सौंपे जाने की संभावना है।
सहयोगी दलों की हिस्सेदारी बढ़ने के संकेत
मंत्रिमंडल फेरबदल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों की मांगें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर बना 20 सांसदों का गुट अब एनडीए के साथ है और उसे सरकार में प्रतिनिधित्व दिए जाने की जरूरत बताई जा रही है। वहीं शिंदे गुट वाली शिवसेना के सांसदों की संख्या जनता दल यूनाइटेड से अधिक हो चुकी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी मंत्रिमंडल में अधिक हिस्सेदारी की मांग कर रही है। इसके अलावा द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को साधने के लिए भी मंत्रिपद को राजनीतिक समीकरण के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की चर्चा है।
उत्तर प्रदेश से रवि किशन के नाम की चर्चा
मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर फिलहाल उत्तर प्रदेश पर भी खास नजर है। राज्य से सांसद रवि किशन का नाम संभावित नए चेहरों में चर्चा में बताया जा रहा है। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान उनके ऊपर सबसे अधिक मीम बनाए गए थे। रवि किशन ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और उत्तर प्रदेश में भाजपा इस जातीय समीकरण को अपने पक्ष में बनाए रखने पर जोर देती रही है। ऐसे में संभावित फेरबदल में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी मिलने की अटकलें लगाई जा रही हैं।



