सागर यूनिवर्सिटी में शोध छात्राओं के आरोपों से मचा हड़कंप, HOD पद से हटाए गए, उच्च स्तरीय जांच जारी

सागर: मध्य प्रदेश के सागर स्थित डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में महिला शोधार्थियों से कथित उत्पीड़न के आरोपों ने विश्वविद्यालय परिसर में हलचल मचा दी है। भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से विभागाध्यक्ष के प्रशासनिक दायित्वों से मुक्त कर दिया है। इस मामले को लेकर छात्र संगठन एबीवीपी ने भी प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई की मांग की।
जानकारी के अनुसार, एक दर्जन से अधिक शोध छात्राओं ने आरोप लगाया है कि विभागाध्यक्ष उन्हें व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर डिनर पर चलने का दबाव बनाते थे और अशोभनीय बातचीत करते थे। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह केवल अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था है, ताकि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी दबाव के पूरी की जा सके।
एचओडी का कार्यभार डीन को सौंपा गया
विश्वविद्यालय प्रशासन के आदेश के अनुसार, आंतरिक शिकायत समिति की जांच पूरी होने तक भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष का कार्यभार व्यावहारिक विज्ञान अध्ययनशाला के अधिष्ठाता को सौंपा गया है। आरोपों में महिला शोधार्थियों के उत्पीड़न के साथ-साथ दबाव बनाने और दस्तावेजों में कथित हेरफेर की भी बात सामने आई है। इससे पहले व्हिसल ब्लोअर अरविंद भट्ट ने भी लिखित शिकायत देकर विभागाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
जुलाई में शिकायत से शुरू हुआ पूरा विवाद
मामले की शुरुआत जुलाई 2026 में हुई, जब भूगोल विभाग की एक महिला शोधार्थी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत देकर विभागाध्यक्ष पर मानसिक उत्पीड़न, अमर्यादित व्यवहार, चाय-नाश्ते के लिए बुलाने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने के आरोप लगाए। इसके बाद 20 जुलाई 2026 को विभागाध्यक्ष की ओर से भी संबंधित शोधार्थियों पर अनुशासनहीनता, अनुपस्थिति और फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र देने के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई।
उच्च स्तरीय जांच समिति की सिफारिश
24 जुलाई 2026 को विज्ञान अध्ययनशाला के प्रो. देवाशीष बोस ने कुलपति को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की अनुशंसा की। उन्होंने शोधार्थियों की सुरक्षा और विश्वविद्यालय की गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। इसके बाद डीन की अनुशंसा और आंतरिक शिकायत समिति की जांच के आधार पर 29 जुलाई 2026 को कुलसचिव कार्यालय ने प्रो. विनोद कुमार भारद्वाज को विभागाध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी किया।
शिकायत वापस लेने के लिए दबाव का भी आरोप
मामले में नया मोड़ तब आया जब 23 और 24 जुलाई को शिकायत वापस लेने से संबंधित पत्र सामने आए। इसके बाद 24 जुलाई 2026 को छह शोधार्थियों ने अधिष्ठाता प्रो. देवाशीष बोस को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि उनसे बंद कमरे में डरा-धमकाकर सादे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए। शोधार्थियों का दावा है कि दो सहायक प्राध्यापकों ने उन्हें पुलिस शिकायत, मानहानि के मुकदमे और करियर बर्बाद करने की धमकी देकर हस्ताक्षर करवाए। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत वापसी वाले पत्र पर उस शोधार्थी के भी हस्ताक्षर थे, जिसने मूल शिकायत दर्ज ही नहीं कराई थी।



