कैंसर के ये 5 संकेत पड़ सकते हैं भारी, एक्सपर्ट्स की चेतावनी- समय रहते पहचान हुई तो पूरी तरह संभव है इलाज

नई दिल्ली: भारत में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और इलाज से इस गंभीर बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है। कैंसर विशेषज्ञों ने लोगों को चेतावनी दी है कि शरीर में दिखाई देने वाले कुछ असामान्य संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार देश में बड़ी संख्या में कैंसर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब बीमारी तीसरी या चौथी स्टेज में पहुंच चुकी होती है। ऐसे में उपचार जटिल हो जाता है और मरीज के ठीक होने की संभावना भी कम हो जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर लाइलाज नहीं है, बशर्ते इसकी पहचान शुरुआती चरण में हो जाए।
इन कैंसरों में शुरुआती पहचान से बढ़ जाती है ठीक होने की संभावना
चिकित्सकों के मुताबिक कुछ प्रकार के कैंसर ऐसे हैं, जिनकी समय रहते पहचान होने पर मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। इनमें मुख कैंसर, स्तन कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर प्रमुख हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर जांच नहीं कराई जाती तो कैंसर कोशिकाएं शरीर के अन्य अंगों जैसे लिवर, फेफड़े और हड्डियों तक फैल सकती हैं। इस स्थिति को चिकित्सा विज्ञान में मेटास्टेसिस कहा जाता है, जिसके बाद उपचार काफी कठिन हो जाता है।
क्यों देर से होती है कैंसर की पहचान?
विशेषज्ञों ने बताया कि अधिकांश लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य स्वास्थ्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसके अलावा कैंसर को लेकर समाज में फैला डर और भ्रांतियां भी लोगों को जांच कराने से रोकती हैं।
एक अन्य बड़ी वजह नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति जागरूकता की कमी है। अधिकांश लोग तब तक डॉक्टर के पास नहीं जाते, जब तक समस्या गंभीर रूप नहीं ले लेती।
इन 5 संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों ने कुछ ऐसे लक्षण बताए हैं जो कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं और जिन पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
- कई सप्ताह तक लगातार बनी रहने वाली खांसी
- बिना डाइटिंग या व्यायाम के अचानक वजन कम होना
- मुंह या जीभ में लंबे समय तक न भरने वाले छाले
- पर्याप्त आराम के बावजूद लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
- शरीर के किसी हिस्से में बिना दर्द वाली गांठ का उभरना
नियमित स्क्रीनिंग को बताया सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार समय पर जांच और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण है। उन्होंने सलाह दी कि 40 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को नियमित मैमोग्राफी और पुरुषों को ओरल कैंसर सहित अन्य आवश्यक स्क्रीनिंग टेस्ट साल में कम से कम एक बार अवश्य कराने चाहिए।
डॉक्टरों का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच और सही उपचार के जरिए कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या में बड़ी कमी लाई जा सकती है।



