
नई दिल्ली: देशभर में आज आषाढ़ पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस बार की पूर्णिमा को ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर ग्रहों के राजा सूर्य, देवगुरु बृहस्पति और चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण समसप्तक राजयोग का निर्माण हो रहा है। पूर्णिमा के दिन सूर्य और बृहस्पति कर्क राशि में विराजमान हैं, जबकि चंद्रमा मकर राशि में स्थित हैं। इस ग्रह स्थिति के चलते सूर्य-चंद्र और गुरु-चंद्र के बीच समसप्तक योग बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इसका प्रभाव कुछ राशियों के लिए शुभ माना गया है।
मेष राशि
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, मेष राशि के जातकों को करियर और व्यापार में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने की संभावना है। लंबे समय से रुके प्रमोशन या वेतन वृद्धि से जुड़ी स्थिति अनुकूल हो सकती है। नए व्यावसायिक अवसर मिलने और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत भी माने जा रहे हैं।
कर्क राशि
कर्क राशि में सूर्य और बृहस्पति की युति होने से इस राशि के जातकों का आत्मविश्वास बढ़ने की संभावना जताई गई है। सामाजिक सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। पारिवारिक जीवन में मधुरता बनी रह सकती है और किसी शुभ या मांगलिक कार्य की योजना बनने के संकेत हैं।
तुला राशि
तुला राशि के लिए यह योग भौतिक सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी का संकेत माना गया है। नया वाहन या मकान खरीदने की योजना आगे बढ़ सकती है। मानसिक तनाव में कमी आने और परिवार का वातावरण सुखद रहने की संभावना व्यक्त की गई है।
मकर राशि
चंद्रमा के मकर राशि में होने और सामने सूर्य तथा बृहस्पति की स्थिति के कारण इस राशि के जातकों के लिए इसे लाभकारी योग माना गया है। साझेदारी से जुड़े कार्यों में लाभ मिलने के संकेत हैं। नए प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए समय अनुकूल माना गया है और रुके हुए कार्यों में गति आने की संभावना बताई गई है।
आषाढ़ पूर्णिमा पर किए जाने वाले पारंपरिक उपाय
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा की रात दूध और गंगाजल मिले जल से चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने और माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने की भी परंपरा है। इसके अलावा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या चने की दाल का दान करने को भी शुभ माना जाता है।



