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मध्य प्रदेश में UCC बिल विधानसभा से पास, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून; जानिए क्या-क्या बदल जाएगा

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई को समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) विधेयक पारित कर दिया है। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद यह कानून के रूप में पूरे प्रदेश में लागू होगा। इसके लागू होने के बाद विवाह, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और अन्य पारिवारिक मामलों में सभी धर्मों के लोगों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद मध्य प्रदेश उन राज्यों की श्रेणी में शामिल होगा, जहां एक से अधिक विवाह करना अपराध माना जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कानून से महिलाओं को समान अधिकार मिलेंगे और उत्तराधिकार से लेकर दत्तक ग्रहण तक सभी मामलों में महिलाओं और पुरुषों के अधिकार समान होंगे।

शादी के पंजीकरण को लेकर क्या होंगे नए नियम?

यूसीसी के तहत 23 सितंबर 2008 से लेकर कानून लागू होने तक हुई ऐसी शादियां, जिनका अब तक पंजीकरण नहीं हुआ है, उनका एक वर्ष के भीतर पंजीकरण कराना होगा। जिनका पहले से पंजीकरण हो चुका है, उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं वर्ष 2008 से पहले हुई शादियों का पंजीकरण स्वैच्छिक रहेगा।

यदि मध्य प्रदेश का कोई निवासी राज्य के बाहर विवाह करता है और उसका पंजीकरण नहीं हुआ है, तो वह भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत विवाह का पंजीकरण करा सकेगा।

यदि निर्धारित समय सीमा में पंजीकरण नहीं कराया गया, तो रजिस्ट्रार नोटिस जारी कर सकेगा। नोटिस के बावजूद पंजीकरण नहीं कराने पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, केवल पंजीकरण नहीं होने के आधार पर विवाह को अवैध नहीं माना जाएगा।

नौकरी में वैवाहिक स्थिति बदलने के लिए जरूरी होगा प्रमाण-पत्र

यूसीसी की धारा 21 के अनुसार, कोई भी सरकारी या निजी संस्थान कर्मचारी के सेवा रिकॉर्ड में वैवाहिक स्थिति तभी बदलेगा, जब संबंधित व्यक्ति यूसीसी के तहत जारी विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करेगा।

इसका मतलब है कि शादी का कार्ड, हलफनामा या अन्य दस्तावेज अब पर्याप्त नहीं होंगे। पति या पत्नी का नाम जोड़ने अथवा वैवाहिक स्थिति में बदलाव के लिए विवाह का आधिकारिक पंजीकरण आवश्यक होगा। हालांकि, इसका प्रभाव पीएफ, पारिवारिक पेंशन, बीमा और अन्य सेवा लाभों पर किस प्रकार पड़ेगा, यह सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले नियमों और दिशा-निर्देशों के बाद स्पष्ट होगा।

संपत्ति विवाद में अदालत नियुक्त करेगी ‘रक्षक’

यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति को लेकर विवाद उत्पन्न होता है या अवैध कब्जे अथवा दुरुपयोग की आशंका होती है, तो अदालत एक ‘रक्षक’ नियुक्त कर सकेगी।

यह रक्षक अदालत की निगरानी में संपत्ति का कब्जा लेकर उसकी सूची तैयार करेगा, आवश्यकता पड़ने पर संपत्ति को सील या सुरक्षित रखेगा, रखरखाव की व्यवस्था करेगा और समय-समय पर अदालत को रिपोर्ट भी देगा। इससे पहले ऐसी व्यवस्था भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 में मौजूद थी, जिसे अब यूसीसी में भी शामिल किया गया है।

प्रदेश से बाहर रहने वाले निवासियों पर भी लागू हो सकता है कानून

यूसीसी ऐसे लोगों पर भी लागू हो सकता है, जो नौकरी, पढ़ाई या कारोबार के कारण दूसरे राज्य में रह रहे हैं, लेकिन कानूनी रूप से मध्य प्रदेश के निवासी हैं।

इसके तहत राज्य में रहने वाले नागरिक, मध्य प्रदेश में पदस्थ राज्य या केंद्र सरकार के कर्मचारी, राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थी, मध्य प्रदेश में जन्मे ऐसे व्यक्ति जिनके माता-पिता राज्य के निवासी हों या यहां अचल संपत्ति हो और जिन्होंने किसी अन्य राज्य की स्थायी निवास स्थिति ग्रहण न की हो, इस कानून के दायरे में आ सकते हैं।

लिव-इन रिलेशनशिप के दुरुपयोग पर भी सख्ती

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति लिव-इन रिलेशनशिप का दुरुपयोग करता है या निर्धारित आयु सीमा (महिला 18 वर्ष और पुरुष 21 वर्ष) का उल्लंघन करता है अथवा विवाहेतर संबंधों के उद्देश्य से लिव-इन व्यवस्था का इस्तेमाल करता है, तो ऐसे मामलों में पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

सीएम ने विपक्ष पर भी साधा निशाना

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि समान कानून सभी नागरिकों के लिए होना चाहिए और धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यवस्था उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार समानता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के आधार पर यह कानून लेकर आई है।

नारी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम: मोहन यादव

सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे मध्य प्रदेश के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा द्वारा ‘मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता, 2026’ विधेयक ध्वनिमत से पारित किया गया है। उनके अनुसार यह कानून महिलाओं के अधिकारों को और मजबूत करेगा तथा समान न्याय, समान अधिकार और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को नई मजबूती देगा।

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