ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने सरकार को कोर्ट में घेरा, जानिए क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ प्लान को लेकर अमेरिका में बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अमेरिका के 25 राज्यों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। राज्यों का आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले की अनदेखी करते हुए नए सीमा शुल्क को जबरन लागू कर रही है।
पिछले महीने अमेरिका ने यूरोपीय संघ समेत 59 देशों पर दोहरे अंकों में नया टैरिफ लागू किया था। ट्रंप प्रशासन का कहना था कि ये देश बंधुआ मजदूरी से तैयार होने वाले उत्पादों के आयात को रोकने में नाकाम रहे हैं। नया टैरिफ ऐसे समय लागू किया गया, जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लागू अस्थायी टैरिफ की अवधि समाप्त हो रही थी।
25 राज्यों ने अदालत में दी चुनौती
इस मुकदमे की अगुवाई न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स कर रही हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में मामला हारने के बाद ट्रंप प्रशासन नए टैरिफ के जरिए एक बार फिर आम परिवारों और कारोबारियों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट से पहले भी मिल चुका है झटका
डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि ऊंचे आयात शुल्क से अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। इसी नीति के तहत उन्होंने पिछले वर्ष 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईईपीए) का उपयोग करते हुए लगभग सभी देशों से होने वाले आयात पर भारी टैरिफ लगा दिया था।
हालांकि, इस वर्ष फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि आईईईपीए के तहत सरकार को टैरिफ लगाने का अधिकार प्राप्त नहीं है। अदालत के इस निर्णय के बाद सरकार को आयातकों से वसूला गया कर वापस करना पड़ा। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लागू किया था, जिसकी अवधि 24 जुलाई की आधी रात को समाप्त हो गई।
अब ट्रेड एक्ट की धारा 301 का लिया सहारा
अस्थायी टैरिफ की अवधि खत्म होने के तुरंत बाद ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 का इस्तेमाल करते हुए 10 से 12.5 प्रतिशत तक का नया टैरिफ लागू कर दिया। यह कानून राष्ट्रपति को अनुचित व्यापारिक गतिविधियों में शामिल देशों पर शुल्क लगाने का अधिकार देता है। नया टैरिफ उन देशों को प्रभावित करता है, जिनसे अमेरिका का लगभग 99 प्रतिशत आयात होता है।
व्हाइट हाउस ने फैसले का किया बचाव
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात को नहीं रोकना अमेरिकी व्यापार और श्रमिकों के हितों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत लगाया गया यह नया टैरिफ पूरी तरह कानूनी और उचित कदम है।



