अन्तर्राष्ट्रीय

US-ईरान डील के बाद बड़ा बदलाव! तेल निर्यात पर राहत की तैयारी, IEA बोला- बिना शर्त खुले होर्मुज तभी लौटेगी स्थिरता

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत के बीच कई अहम दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यवहार और निर्णय लेने की शैली को समझने के लिए अपनी वार्ता टीम में मनोवैज्ञानिकों को शामिल किया था। इसी बीच संभावित अमेरिका-ईरान समझौते, होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल निर्यात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में इस्लामाबाद में हुई शुरुआती अप्रत्यक्ष वार्ता के बाद ईरान ने दो वरिष्ठ मनोवैज्ञानिकों को सलाहकार टीम में शामिल किया। उनका काम ट्रंप के व्यवहार का विश्लेषण करना और ऐसे संदेश तैयार करना था, जिन्हें क्षेत्रीय मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया जा सके। बताया गया है कि इन विशेषज्ञों ने वार्ता रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।

चीन ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना की

अमेरिका और ईरान के बीच संवाद प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर चीन ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार से बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता प्रयासों की सराहना की।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बनी हुई है अनिश्चितता

वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजरें फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हुई हैं। जापानी शिपिंग कंपनी मित्सुई ओएसके लाइन्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा है कि जहाज मालिक तब तक सामान्य आवाजाही शुरू करने को तैयार नहीं हैं, जब तक अमेरिका-ईरान शांति समझौते की स्थिरता को लेकर पूरा भरोसा नहीं बन जाता। उनका मानना है कि समुद्री यातायात को पूरी तरह सामान्य होने में कई सप्ताह या एक महीने तक का समय लग सकता है।

समझौते के बाद ईरानी तेल निर्यात को मिल सकती है राहत

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होते ही ईरान को तेल और ईंधन निर्यात की अनुमति मिलने का रास्ता खुल सकता है। इसके साथ ही बैंकिंग, परिवहन और बीमा जैसी सेवाओं पर भी प्रतिबंधों में राहत दिए जाने की संभावना जताई गई है, जिससे ईरानी तेल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में वापसी आसान हो सकेगी।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि समझौते के ढांचे में 300 अरब डॉलर के निजी निवेश फंड का प्रावधान शामिल है। यह फंड ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और परिवहन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

IEA की चेतावनी- बिना शर्त खुले होर्मुज

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने कहा है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का बिना किसी शर्त के खुला रहना बेहद जरूरी है। एजेंसी का मानना है कि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

नेतन्याहू बोले- विनाश का खतरा टाला

अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर इस्राइल में राजनीतिक बहस तेज है। इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान को किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि इस्राइल ने अपने ऊपर मंडरा रहे बड़े खतरे को टालने में सफलता हासिल की है और देश को संभावित विनाश से बचाया है।

लेबनान को लेकर नया विवाद

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने वाला समझौता लागू होता है, तो इस्राइल को लेबनान से भी अपनी सेना हटानी होगी। उनका कहना है कि दक्षिणी लेबनान में इस्राइली सैन्य मौजूदगी जारी रहना समझौते की भावना के विपरीत होगा।

हालांकि इस्राइल ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल लेबनान से अपनी सेना वापस बुलाने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में युद्धविराम और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर कई सवाल अभी भी बने हुए हैं।

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