अन्तर्राष्ट्रीय

इजराइल में आम चुनाव के लिए मतदान, दुनिया की नजर नेतन्याहू बनाम आइजनकोट की टक्कर पर

नई दिल्ली ( दस्तक डेस्क) : इजराइल में मंगलवार सुबह सात बजे (स्थानीय समय) आम चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। मतदाता रात 10 बजे तक वोट डाल सकेंगे। यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा, ईरान, लेबनान, सीरिया तथा यमन में हुई लड़ाइयों के बाद पहला आम चुनाव है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का सीधा मुकाबला पूर्व आईडीएफ प्रमुख गादी आइजनकोट से माना जा रहा है। पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि नेतन्याहू सत्ता में बने रहते हैं या हार का सामना करते हैं।

120 सीटों वाली नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। चुनावी सर्वेक्षणों से साफ है कि किसी भी दल या गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने वाला। इजराइल में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू है, जिसमें पार्टियों को वोट के अनुपात में सीटें मिलती हैं। यही वजह है कि यहां गठबंधन सरकारें आम हैं। अगर कोई गुट 61 सीटों तक नहीं पहुंचता तो अल्पमत सरकार बन सकती है। वह भी न बनी तो नए चुनाव कराने पड़ सकते हैं। तब तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे।

बेंजामिन नेतन्याहू पिछले ढाई दशकों से इजराइली राजनीति के केंद्र में हैं। इस समय वे देश की सबसे दक्षिणपंथी सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। सत्ता में बने रहने के लिए वे अन्य दक्षिणपंथी नेताओं का सहारा ले सकते हैं, जो वेस्ट बैंक को इजराइल में मिलाने और गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की मांग कर रहे हैं।

गादी आइजनकोट: नया चेहरा, जवाबदेही का एजेंडा

नेतन्याहू को सबसे कड़ी टक्कर गादी आइजनकोट से मिल रही है। पूर्व सेना प्रमुख आइजनकोट ने पिछले साल ‘यशर पार्टी’ बनाई थी। यह पार्टी का पहला चुनाव है। गाजा युद्ध के शुरुआती महीनों में उनके सैनिक बेटे की मौत हो गई थी। वे नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट में शामिल थे, लेकिन युद्ध से निपटने के तरीके पर असहमति जताते हुए 2024 में इस्तीफा दे दिया था। उनका चुनाव अभियान 7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलता की जवाबदेही तय करने पर केंद्रित है।मैदान में पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और एविग्दोर लीबरमैन भी हैं। दोनों धुर दक्षिणपंथी माने जाते हैं।

चुनाव से ठीक पहले कुछ इजराइली नागरिकों ने बदलाव की मांग की, जबकि कुछ ने नेतन्याहू के सत्ता में बने रहने का समर्थन जताया। गाजा में फिलिस्तीनियों का कहना है कि नेतृत्व परिवर्तन से कब्जे के तहत उनके जीवन की वास्तविकता में कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। मतदान खत्म होने के बाद नतीजों पर नजर रहेगी कि इजराइल की राजनीति में स्थिरता आएगी या फिर एक बार और गठबंधन की उलझन का सामना करना पड़ेगा।

Related Articles

Back to top button