गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 की वापसी किसानों की बड़ी जीत
जय किसान आंदोलन के सजग हस्तक्षेप और किसान एकजुटता का परिणाम।
Meerut News : जय किसान आंदोलन केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 2026 को वापस लिए जाने का स्वागत करता है। यह देश के करोड़ों गन्ना किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा राज्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए उठी संगठित किसान आवाज की महत्वपूर्ण जीत है।
सीसीएसयू मेरठ में की गई थी व्यापक परिचर्चा
8 मई 2026 को जय किसान आंदोलन द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में प्रस्तावित गन्ना आदेश पर एक व्यापक परिचर्चा आयोजित की गई थी। इस परिचर्चा में वरिष्ठ किसान नेता योगेंद्र यादव, ग्रामीण मामलों के वरिष्ठ पत्रकार हरवीर सिंह (रूरल वॉयस), जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष भारती सहित अनेक किसान नेताओं, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया था। चर्चा के दौरान प्रस्तावित आदेश के विभिन्न प्रावधानों पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई थीं।
बाजार प्रतिस्पर्धा और राज्यों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव
जय किसान आंदोलन ने बिंदुवार तरीके से स्पष्ट किया था कि प्रस्तावित गन्ना (नियंत्रण) आदेश किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार, छोटे खंडसारी एवं कोल्हू उद्योगों, बाजार प्रतिस्पर्धा और राज्यों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। विशेष रूप से एथेनॉल को मुख्य उत्पाद की श्रेणी में शामिल करने, मिलों के बीच दूरी 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 25 किलोमीटर करने, किसानों पर अतिरिक्त ढुलाई खर्च डालने तथा राज्यों के SAP निर्धारण अधिकारों को सीमित करने जैसे प्रावधानों का व्यापक विरोध किया गया था।
अब केंद्र सरकार द्वारा 29 मई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से इस मसौदा आदेश को वापस लेना यह साबित करता है कि किसानों की लोकतांत्रिक आवाज और तथ्यपूर्ण हस्तक्षेप को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।



