
सोशल मीडिया पर विधानसभा को लेकर गलत टिप्पणी पड़ेगी भारी, सचिवालय ने जारी किया सख्त आदेश; एफआईआर की भी चेतावनी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने सोशल मीडिया पर विधानसभा, उसके अधिकारियों, कर्मचारियों और विधानसभा अध्यक्ष के बारे में अनर्गल, असत्य या निराधार टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे की ओर से जारी नोटिस में ऐसी सामग्री को गलत और गैरकानूनी बताते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
आपत्तिजनक और निराधार पोस्ट पर होगी कार्रवाई
नोटिस में कहा गया है कि सोशल मीडिया के अलग-अलग मंचों पर विधानसभा, उसके अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष के संदर्भ में आपत्तिजनक, अवांछनीय और निराधार टिप्पणियां की जा रही हैं। सचिवालय ने ऐसी सामग्री को गलत और गैरकानूनी माना है। नोटिस के मुताबिक, विधानसभा एक संवैधानिक संस्था है और उसके बारे में झूठी या बेबुनियाद जानकारी प्रसारित करना अनुचित होने के साथ कानूनी रूप से दंडनीय भी हो सकता है।
सूचना निदेशालय को दिए गए निर्देश
प्रमुख सचिव विधानसभा ने सूचना निदेशालय को निर्देश दिया है कि इस आदेश की जानकारी सोशल मीडिया मंचों के संचालकों और संबंधित लोगों तक पहुंचाई जाए। नोटिस में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति विधानसभा, उसके अधिकारियों, कर्मचारियों या अध्यक्ष के बारे में आपत्तिजनक, असत्य अथवा अनर्गल सामग्री पोस्ट करता है, तो उसके खिलाफ संबंधित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बिना सत्यापन पोस्ट करने पर भी सख्ती
सचिवालय की ओर से जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तथ्यों की जांच और प्रमाणीकरण के बिना सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई किसी सामग्री या टिप्पणी को अविधिक और अनधिकृत माना जाएगा। यानी विधानसभा से संबंधित जानकारी साझा करने से पहले उसके तथ्यों की पुष्टि करने पर जोर दिया गया है।
भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर की चेतावनी
नोटिस में कहा गया है कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी भी दर्ज की जा सकती है। सचिवालय के इस आदेश के बाद विधानसभा और उससे जुड़े अधिकारियों के बारे में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक या बिना सत्यापन की सामग्री पोस्ट करने वालों पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।
पुलिस और प्रशासन को भी भेजी गई आदेश की प्रति
इस आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव, सूचना एवं गृह विभाग संजय प्रसाद और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गई है। इसके जरिए प्रशासन और पुलिस स्तर पर भी आवश्यक निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
संवैधानिक संस्था की गरिमा का हवाला
विधानसभा सचिवालय की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सोशल मीडिया पर संवैधानिक संस्थाओं और उनके पदाधिकारियों से जुड़ी सूचनाएं तेजी से प्रसारित होती हैं। सचिवालय का कहना है कि गलत और निराधार सामग्री से संस्था की गरिमा प्रभावित होने के साथ लोगों के बीच गलत धारणा भी बन सकती है। इसी को देखते हुए सोशल मीडिया पर विधानसभा से संबंधित सामग्री को लेकर सख्ती का संदेश दिया गया है।



