
यमुनानगर: शराब कारोबार से जुड़े 21.30 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद एक्साइज एवं टैक्सेशन विभाग में हलचल बढ़ गई है। शिकायतकर्ता अभिनव कोहली ने शराब कारोबार से जुड़ी दो बड़ी फर्मों पर आरोप लगाया है कि एक्साइज विभाग के सॉफ्टवेयर में कथित हेरफेर कर सरकारी राजस्व को करीब 21.30 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। शिकायत के अनुसार, इस मामले में 100 से ज्यादा फर्जी ई-जीआरएन नंबर बनाए गए, जिनके जरिए कथित तौर पर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।
गोदाम सील होने के बाद दोबारा खुलने का आरोप
मामला सामने आने के बाद विभाग ने दोनों शराब फर्मों के गोदाम सील कर दिए थे। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि गोदाम सील किए जाने के महज दो दिन बाद ही उन्हें दोबारा खोल दिया गया। इसे लेकर उन्होंने एक्साइज एवं टैक्सेशन विभाग की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।
अभिनव कोहली का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप सामने आए हैं तो दोनों फर्मों के लाइसेंस रद्द किए जाने चाहिए और उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज होना चाहिए।
विभाग ने 5 करोड़ रुपये की रिकवरी की
मामले में अब एक्साइज एवं टैक्सेशन विभाग का पक्ष भी सामने आया है। डीईटीसी जितेंद्र कुमार के मुताबिक, विभाग अब तक 5 करोड़ रुपये की रिकवरी कर चुका है। विभाग का कहना है कि बाकी रकम की भी जल्द से जल्द वसूली का प्रयास किया जा रहा है।
31 करोड़ की संपत्ति के दस्तावेज विभाग के पास
विभाग के अनुसार, दोनों फर्मों से संबंधित करीब 31 करोड़ रुपये की संपत्ति के दस्तावेज उसके पास मौजूद हैं। इन्हीं संपत्तियों को रिकवरी की प्रक्रिया में आधार बनाया जा रहा है। कथित धोखाधड़ी की पूरी जांच के लिए विभाग ने एक कमेटी का गठन भी किया है, जो मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है।
शिकायत और विभाग के दावों से सामने आए अलग-अलग पहलू
एक तरफ शिकायतकर्ता ने 21.30 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी और एक्साइज सॉफ्टवेयर में हेरफेर के आरोप लगाए हैं, वहीं विभाग 5 करोड़ रुपये की रिकवरी और आगे की जांच की बात कह रहा है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी राजस्व को हुए नुकसान की अंतिम रकम कितनी सामने आती है और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।



