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‘तुम्हारी आवाज़ रिकॉर्डिंग लायक नहीं…’ जब स्टूडियो से लौटा दिए गए थे किशोर कुमार और आशा भोसले, फिर रच दिया इतिहास

नई दिल्ली: हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले महान गायक किशोर कुमार और आशा भोसले ने सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने से पहले संघर्ष के ऐसे दौर भी देखे, जिनकी कल्पना करना आज मुश्किल लगता है। हाल ही में आशा भोसले ने अपने शुरुआती करियर से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया, जिसने उस दौर के संगीत जगत की चुनौतियों को फिर से चर्चा में ला दिया।

जब आवाज़ को कर दिया गया था खारिज

आशा भोसले ने एक बातचीत के दौरान बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में वह और किशोर कुमार एक गाने की रिकॉर्डिंग के लिए स्टूडियो पहुंचे थे। रिकॉर्डिंग शुरू होते ही वहां मौजूद रिकॉर्डिस्ट ने उनकी गायकी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी आवाज़ इस गीत के लिए उपयुक्त नहीं है और किसी दूसरे गायक को बुलाया जाना चाहिए।

यह टिप्पणी दोनों कलाकारों के लिए बेहद निराशाजनक थी। हालांकि उन्होंने किसी तरह की बहस नहीं की और चुपचाप स्टूडियो से बाहर निकल गए।

स्टूडियो से निकलकर रेलवे स्टेशन पर खाया खाना

आशा भोसले ने बताया कि उस समय दोनों लंबे समय से काम में व्यस्त थे और काफी भूखे भी थे। रिकॉर्डिंग रुकने के बाद वे पास के रेलवे स्टेशन पहुंचे, जहां उन्होंने खाना खाया और चाय पी। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस घटना को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन किशोर कुमार इससे काफी आहत और नाराज हो गए थे।

सालों बाद फिर हुआ उसी शख्स से सामना

समय बीतने के साथ दोनों कलाकारों ने अपनी प्रतिभा के दम पर संगीत की दुनिया में बड़ी पहचान बना ली। बाद में एक रिकॉर्डिंग सत्र के दौरान उनकी मुलाकात उसी रिकॉर्डिस्ट से हुई, जिसने कभी उनकी आवाज़ को खारिज कर दिया था।

आशा भोसले के मुताबिक, उसे देखते ही किशोर कुमार को पुरानी घटना याद आ गई और उन्होंने अपनी नाराजगी जताने की कोशिश की। हालांकि आशा ने उन्हें समझाया कि पुरानी बातों को लेकर किसी के सम्मान या रोज़गार को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। इसके बाद मामला शांत हो गया।

रिकॉर्डिंग रूम में मस्ती से भर देते थे माहौल

आशा भोसले ने किशोर कुमार के साथ अपने रिश्ते को याद करते हुए बताया कि शुरुआती दौर में दोनों ने साथ मिलकर कई गीत रिकॉर्ड किए। रिकॉर्डिंग के दौरान किशोर कुमार अक्सर मजाक करते रहते थे और उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारकर हंसाते थे।

उन्होंने कहा कि समय के साथ दोनों के बीच गहरी दोस्ती विकसित हुई और यही आत्मीयता उनके गीतों में भी महसूस की जा सकती थी।

मूड देखकर समझ जाती थीं आशा भोसले

आशा भोसले ने बताया कि किशोर कुमार बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। गायन के अलावा अभिनय, संगीत निर्देशन, निर्माण और लेखन में भी उनकी अलग पहचान थी।

उन्होंने कहा कि वह उनके पहनावे से ही उनके मूड का अंदाजा लगा लेती थीं। जब वह सफेद कुर्ता-धोती और टोपी पहनकर आते थे तो समझ जाती थीं कि उनका मूड अच्छा है। वहीं, साधारण कपड़ों और बिखरे बालों के साथ आने पर वह कम बातचीत करती थीं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

यह घटना इस बात की मिसाल है कि शुरुआती अस्वीकृति किसी कलाकार की अंतिम पहचान तय नहीं करती। जिन आवाज़ों को कभी रिकॉर्डिंग के योग्य नहीं माना गया था, वही आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय और कालजयी गीतों की पहचान बन गईं। किशोर कुमार और आशा भोसले का सफर आज भी लाखों लोगों को मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास का संदेश देता है।

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