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नया खुलासाः हवा में ही टुकड़े-टुकड़े हो गया था रशियन प्लेन, 8 KM दूर मिली एक बॉडी

दस्तक टाइम्स/एजेंसी:

russia-plane_1446430695काहिरा. मिस्र में क्रैश हुए रशियन पैसेंजर प्लेन एयरबस ए-321 के हवा में ही कई टुकड़े हो गए थे। इस नए खुलासे के मुताबिक, हवा में ही टुकड़े-टुकड़े हो जाने के बाद प्लेन का मलबा दूर-दूर तक फैल गया। हादसे की जांच कर रहे एक एक्सपर्ट ने यह दावा किया है। बता दें कि मिस्र के शर्म-अल-शेख से रूस के सेंट पीटर्सबर्ग जा रहा रशियन एयरलाइन कोलेविया का प्लेन शनिवार को क्रैश हो गया था। प्लेन में सवार सभी 224 लोगों की मौत हो गई थी।
 
इस दावे में कितना दम?
प्लेन के हवा में ही टूट जाने के दावे को इसलिए भी मजबूती मिलती है, क्योंकि रविवार को सर्च एंड रेस्क्यू टीम को क्रैश साइट से आठ किलोमीटर दूर एक लड़की की बॉडी मिली। प्लेन का मलबा सिनाई के साउथ अरीश में मिला था।
 
एक्सपर्ट्स को जांच पूरी होने का इंतजार
 रशियन न्यूज एजेंसी रिया-नोवोस्टी ने काहिरा से बताया है,”प्लेन के कई टुकड़े हवा में ही बिखर गए थे।”
 रूसी इंटर-स्टेट एविएशन कमेटी के सीनियर अफसर विक्टोर सोरोचेन्को ने इस दावे की पुष्टि की है।
 सोरोचेन्को ने कहा, ”फिलहाल, किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।”
 
बता दें कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने दावा किया है कि उसने A-321 को मार गिराया था। 
 
प्रेसिडेंट अदेल फतह अल-सिस ने शनिवार को हुए हादसे की जांच के लिए वक्त मांगा है।
जांचकर्ताओं को फ्लाइट का ब्लैक बॉक्स मिल गया है। मिस्र की सरकार ने ब्लैक बॉक्स के कंटेंट की जांच की बात की है। रूस और मिस्र मिलकर जांच कर रहे हैं।
 
कैसे हुआ था हादसा?
– एयरबस ए-321 फ्लाइट नंबर 7K9268 ने शनिवार सुबह 6.51 मिनट (मॉस्को के वक्त के मुताबिक) पर शर्म अल-शेख से उड़ान भरी थी।
– इसे दोपहर 12.10 मिनट पर सेंट पीटर्सबर्ग के पुलकोवो एयरपोर्ट पर लैंड करना था।
– इसमें सात क्रू मेंबर और 17 बच्चों समेत 224 पैसेंजर थे। एयरपोर्ट से उड़ान के 23 मिनट बाद प्लेन रडार से गायब हो गया।
– यह रूस के कोलेविया एयरलाइन्स का प्लेन था। प्लेन में ज्यादातर रशियन सवार थे।
– रशियन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसा प्लेन में आई तकनीकी खामियों के चलते हुआ। जबकि आईएसआईएस ने इसे मार गिराया जाने का दावा किया है।
 
इससे पहले एक्सपर्ट्स ने क्या किए थे दावे?
 
 ग्लोबल एविएशन कम्युनिटी फ्लाइट ग्लोबल के कन्सल्टिंग एडिटर डेविड लर्नमाउंट ने कहा था कि इस वक्त किसी भी आशंका को खारिज करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा था, ”फ्लाइट रडार डाटा से साफ है कि उड़ान के दौरान कोई प्राॅब्लम आई। हालांकि, हमें यह नहीं पता कि ऐसा क्यों हुआ। हादसे वाले इलाके में बहुत सारे आतंकी संगठन काम कर रहे हैं। इनमें से कई इस्लामिक स्टेट से जुड़े हुए हैं। मिस्र के लोग शर्म अल-शेख एयरपोर्ट की हिफाजत के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी इकोनॉमी बहुत हद तक टूरिज्म पर बेस्ड है, जिसे निशाना बनाना सबसे आसान काम है। हालांकि, यह प्लेन कंधे से फायर किए जा सकने वाले किसी लॉन्चर की जद से बाहर था। यह एमएच 17 की हाइट से 2 हजार फीट नीचे उड़ रहा था।” बता दें कि मलेशियाई एयरलाइन्स के एमएच 17 प्लेन को यूक्रेन के एयरस्पेस में कथित तौर पर बक मिसाइल से मार गिराया गया था।
इजिप्ट की आर्मी के प्रवक्ता मोहम्मद समीर ने कहा, ”दावे तो कुछ भी किए जा सकते हैं, लेकिन अब तक कोई सबूत नहीं मिले, जिनके आधार पर कहा जा सके कि इस हादसे के लिए आतंकी जिम्मेदार हैं। हमें शक है कि आतंकियों के पास इतनी ऊंचाई तक मार करने वाला वेपन है। प्लेन 30 हजार फीट की ज्यादा ऊंचाई पर उड़ान भर रहा था।”
 
सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस के एनालिस्ट मुख्तार अवाद ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में कहा था, ”आतंकियों के बयान में यह नहीं बताया गया कि वे प्लेन को गिराने में कैसे कामयाब हुए? लेटेस्ट पोर्टेबल सरफेस टू एयर मिसाइल भी इतनी ऊंचाई तक नहीं पहुंच सकती। सिर्फ टेकऑफ और लैंडिंग के वक्त ही हमले का खतरा रहता है। प्लेन तो तयशुदा ऊंचाई तक पहुंच चुका था।”
 
 फ्रांस एयर एंड स्पेस म्यूजियम के पूर्व डायरेक्टर जेरार्ड फल्डजर ने कहा था, ”आईएस के पास 9 हजार मीटर ऊपर उड़ रहे प्लेन को निशाना बनाने लायक हथियार नहीं हैं।” वहीं, फ्रांस एविएशन एजेंसी बीईए के पूर्व डायरेक्टर जीन पॉल ट्रोडेक ने कहा, ”ऐसा करने के लिए ट्रेन्ड लोगों और इक्विपमेंट्स की जरूरत होती है, जो मेरी जानकारी के मुताबिक आईएस के पास नहीं हैं।”

 

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