अन्तर्राष्ट्रीय

‘होर्मुज को सौदेबाजी का हथियार नहीं बनाना चाहिए’, अमेरिका-ईरान वार्ता ठप होने पर कतर की दो टूक

दोहा : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब सीधे समुद्री शक्ति-संघर्ष में बदलता दिख रहा है, जहां फारस की खाड़ी का हर जहाज एक नए टकराव का संकेत बन गया है। कूटनीति ठप है, बातचीत रुकी हुई है और आरोप-प्रत्यारोप की आग लगातार भड़क रही है। इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक मार्ग पर दबाव और नियंत्रण की राजनीति तेज हो गई है, जिससे पूरा पश्चिम एशिया अस्थिरता के कगार पर खड़ा है। ऐसे में अब कतर ने इस पूरे मामले में बयान जारी कर सख्त चेतावनी दी है।

कतर का कहना है कि फारस की खाड़ी में शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसलिए होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री मार्ग को किसी भी हालत में राजनीतिक सौदेबाजी का हथियार नहीं बनने दिया जा सकता। मामले में कतर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को किसी भी तरह से सौदेबाजी का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।

कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे अमेरिका और ईरान के बीच ठप पड़ी शांति वार्ता को लेकर भी अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रुकी हुई है, तब तक इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को राजनीति का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए। बता दें कि यह वही जलमार्ग है जिससे दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और व्यापार गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की तनावपूर्ण स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है।

इसके इतर ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि उसके जहाजों को रोककर जब्त किया जा रहा है, जिसे उसने समुद्री डकैती बताया है। ईरान के यूएन में राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और वैश्विक व्यापार के लिए खतरा पैदा करती है। ईरान ने यह भी कहा कि अमेरिका की ये कार्रवाई कूटनीति के बजाय दबाव बनाने की नीति है और इससे अंतरराष्ट्रीय नियम कमजोर हो रहे हैं।

इसी बीच रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने तनाव कम करने के लिए एक नया प्रस्ताव भी दिया है, जिसमें कहा गया है कि अगर उस पर से सैन्य दबाव हटाया जाए और हमले रोके जाएं, तो वह होर्मुज क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां कम कर सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस मुद्दे पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बातचीत की है। ऐसे में अमेरिका की ओर से कहा गया है कि वह इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, लेकिन ईरान को इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं दिया जा सकता। वहीं अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि बातचीत की संभावना है, लेकिन शर्तें सख्त रहेंगी।

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