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मराठा आरक्षण पर जरांगे का बड़ा ऐलान, 20 दिन बाद अनशन खत्म; सरकार को 3 महीने का समय

अहिल्यानगर, महाराष्ट्र: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे ने 20 दिन से जारी अपना अनशन खत्म कर दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को अपनी मांगों पर फैसला लेने के लिए 3 महीने का समय दिया है। इससे पहले लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ रही थी और डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल इलाज कराने की सलाह दी थी। इसी दौरान मुंबई पुलिस ने भी उन्हें नोटिस भेजकर उनके बयानों में विरोधाभास को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था।

आजाद मैदान में प्रदर्शन की नहीं मिली अनुमति

मनोज जरांगे मुंबई के आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति मांग रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बार-बार अनुमति देने से इनकार किया। पुलिस के मुताबिक, जरांगे ने पहले लिखित तौर पर बताया था कि वह अकेले सिर्फ 50 लोगों के साथ प्रदर्शन करेंगे। हालांकि, जालना से मुंबई के लिए रवाना होते समय उनके साथ बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ देखी गई।

15 सितंबर को भेजे गए नोटिस में पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की पूरी सूची, उनकी कुल संख्या और इस्तेमाल होने वाले वाहनों की जानकारी मांगी थी।

तबीयत बिगड़ी तो पातोदा में रुके

तबीयत खराब होने के कारण जरांगे बुधवार तड़के बीड जिले के पातोदा में रुक गए थे। डॉक्टरों ने डिहाइड्रेशन और अन्य परेशानियों के चलते उन्हें तुरंत इलाज कराने की सलाह दी थी। जरांगे ने कहा था कि इलाज के बाद वह गुरुवार दोपहर मुंबई की ओर अपना सफर फिर शुरू करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा था कि अगर उन्हें रास्ते में रोका गया तो मराठा समाज के लोग खुद मुंबई की ओर निकल पड़ें।

OBC कोटे में आरक्षण की मांग

मनोज जरांगे लंबे समय से मराठा समाज को OBC कोटे में आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि सरकार सतारा और औंध राज्य के पुराने गजट को लागू करे, ताकि पात्र मराठा परिवारों को कुंबी जाति प्रमाण पत्र मिल सकें।

जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कहा था कि अगर सरकार को उनकी सेहत की चिंता है तो उनकी समस्या का समाधान किया जाए। अब उन्होंने अनशन खत्म करते हुए सरकार को 3 महीने का समय दिया है, ताकि इस दौरान उनकी मांगों पर फैसला लिया जा सके।

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