
नई दिल्ली: देश की राजनीति में नए दलों के गठन का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि भारत में औसतन हर 10 दिन में एक नई राजनीतिक पार्टी अस्तित्व में आ रही है। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही 21 नए राजनीतिक संगठनों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया है, जिससे देश में सक्रिय राजनीतिक दलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
हर महीने तीन से ज्यादा नए दलों का गठन
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में हर महीने तीन से अधिक नई राजनीतिक पार्टियां बनने की रफ्तार बनी हुई है। वर्ष 2025 में 36 नए राजनीतिक दलों का पंजीकरण हुआ था, जबकि 2024 में यह संख्या 148 तक पहुंच गई थी। इनमें से लगभग 100 दल लोकसभा चुनाव से पहले गठित किए गए थे।
2500 से ज्यादा गैर-मान्यता प्राप्त दल मौजूद
चुनाव आयोग ने पिछले वर्ष 345 गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों का पंजीकरण समाप्त कर दिया था। आयोग के अनुसार ये दल लगातार छह वर्षों तक न तो किसी चुनाव में शामिल हुए और न ही आवश्यक वित्तीय व संगठनात्मक विवरण जमा कर पाए। इसके बावजूद देश में अब भी करीब 2500 गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दल मौजूद हैं।
बंगाल की सियासत से चर्चा में आई नई पार्टी
पश्चिम बंगाल की राजनीति में हालिया घटनाक्रम के बाद ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ अचानक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गई। तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों के इस दल में शामिल होने और बाद में एनडीए को समर्थन देने से यह राजनीतिक समीकरणों का अहम हिस्सा बन गई। इससे पहले इस पार्टी का कोई सांसद या विधायक नहीं था।
चुनावों में छोटे दलों की बढ़ती भूमिका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़ी संख्या में मौजूद छोटे और गैर-मान्यता प्राप्त दल चुनावी रणनीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई बार बड़े राजनीतिक दल इन छोटे संगठनों का उपयोग अपने पक्ष में चुनावी समीकरण बनाने, वोटों के बंटवारे को प्रभावित करने या अन्य रणनीतिक उद्देश्यों के लिए करते हैं।
चंदे और पारदर्शिता पर उठते रहे हैं सवाल
राजनीतिक दलों की बढ़ती संख्या के बीच चुनावी चंदे की पारदर्शिता को लेकर भी बहस जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक दलों को प्राप्त चंदे पर आयकर में विशेष छूट मिलती है। 2000 रुपये तक के नकद दान पर दानदाता की विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य नहीं होने के कारण कई बार वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित है महत्वपूर्ण याचिका
राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लंबित है। याचिका में 2000 रुपये तक के नकद चंदे की व्यवस्था समाप्त करने और राजनीतिक दलों को मिलने वाले सभी प्रकार के चंदे को आयकर निगरानी के दायरे में लाने की मांग की गई है। शीर्ष अदालत इस मामले पर सुनवाई के लिए पहले ही सहमति जता चुकी है।



