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पक्ष-विपक्ष सब हो गया एक, जब इजराइल की संसद में पड़े PM मोदी के कदम

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल के दो दिवसीय दौरे पर हैं. आज यानी गुरुवार को उनकी यात्रा का आखिरी दिन है. पूरा इजराइल मोदीमय है. क्या सत्तापक्ष और क्या विपक्ष, हर कोई पीएम मोदी का स्वागत करने में जुटा है. कोई उनके साथ तस्वीर खिंचवाने तो कोई उनसे हाथ मिलाने को बेताब है. इजराइल में पीएम मोदी की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बुधवार को जब संसद नेसेट में उनके कदम पड़े तो पक्ष और विपक्ष एक हो गया.

इजराइल का विपक्ष प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भले ही विरोध करता हो, लेकिन उनके दोस्त पीएम मोदी को उसने खूब सम्मान दिया है. इजराइली संसद में जब पीएम मोदी बोल रहे थे तो विपक्ष ने इजराइल की अंदरूनी राजनीति को लेकर भारतीय PM का बॉयकॉट नहीं किया. विपक्ष ने भाषण के लिए संसद में रहने का फैसला किया और जब PM ने अपना भाषण अम यिरेल चाई (इज़राइल के लोग जीते हैं) के साथ खत्म किया, तो पूरा नेसेट तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. सभी सांसदों ने खड़े होकर पीएम मोदी के भाषण की सराहना की.

विपक्षी सांसदों ने बुधवार शाम को संसद से वॉकआउट किया था. वे स्पीकर आमिर ओहाना और पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के भाषणों को भी नहीं सुने. विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में हुए स्पेशल लेजिस्लेटिव सेशन से हाई कोर्ट प्रेसिडेंट आइजैक अमित को बाहर रखने के विरोध में थे. लेकिन जब पीएम मोदी के बोलने की बारी तो सभी विपक्षी सांसद संसद में दाखिल हो गए. विपक्षी नेता यायर लैपिड ने पीएम मोदी का स्वागत किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि विरोध का आपसे कोई लेना-देना नहीं है.

इजराइली संसद को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, इजराइल की तरह भारत भी आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की एक सुसंगत और अडिग नीति अपनाता है और इसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं है. पीएम मोदी ने कहा, मैं सात अक्टूबर (2023) को हमास द्वारा किए गए बर्बर आतंकवादी हमले में जान गंवाने वाले हर व्यक्ति और उस परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं जिसकी दुनिया इस हमले में बिखर गई.

उन्होंने कहा, हम आपकी पीड़ा को समझते हैं. हम आपके शोक में आपके साथ हैं. भारत इस समय और भविष्य में भी पूरी दृढ़ता के साथ इजराइल के साथ खड़ा है. कोई भी कारण नागरिकों की हत्या को जायज नहीं ठहरा सकता. आतंकवाद को किसी भी तरह जायज नहीं ठहराया जा सकता. यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का नेसेट में दिया गया पहला भाषण है.

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