भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सीधी में औचक निरीक्षण के समय जनप्रतिनिधियों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पीएस धनवाल की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत की थी। इस पर उन्होंने धनवाल को निलंबित करने के निर्देश दिए थे। अपेक्स बैंक ने उन्हें बैंक की गड़बड़ियों, कर्मचारियों को अनुचित लाभ पहुंचाने और जांच में असहयोग करने के आधार पर निलंबित कर दिया।
इस आदेश को उन्होंने जबलपुर हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए आदेश को स्थगित करने की मांग की, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। बैंक अधिकारियों के अनुसार, याचिका पर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई की।
मुख्यमंत्री का साफ संदेश जवाबदेही जरूरी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा कि किसी भी अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि पद के साथ जवाबदेही भी जुड़ी होती है और अगर शिकायतें मिलती हैं तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी। यह संदेश सभी अधिकारियों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
जनता की शिकायतें बनी बड़ी वजह
इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका जनता और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों ने निभाई। लोगों ने प्रशासन और बैंक की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इन्हीं शिकायतों के आधार पर समीक्षा की गई और फिर सख्त फैसला लिया गया।
जिले में बढ़ी प्रशासनिक हलचल
इस कार्रवाई के बाद सीधी जिले में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अधिकारी अब ज्यादा सतर्क नजर आ रहे हैं और कामकाज में सुधार की कोशिश कर रहे हैं। राज्य सरकार ने भी साफ कर दिया है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
सरकार का बड़ा संदेश साफ और सख्त
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि सरकार अब कामकाज में पारदर्शिता और जिम्मेदारी चाहती है। जो अधिकारी अपने काम में लापरवाही करेंगे उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होगी। इससे आम जनता को भी भरोसा मिला है कि उनकी आवाज सुनी जा रही है।




