
नई दिल्ली : तमिलनाडु में चुनावी हलचल तेज़ है। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार राज्य के दौरे कर भाजपा (BJP) और एनडीए (NDA) उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तमिलनाडु में गुमशुदगी ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं।
पिछले दो महीनों में पीएम मोदी ने तीन बार तमिलनाडु का दौरा किया और एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में जनसभाओं को संबोधित किया। उनका प्रचार अभियान 15 अप्रैल को नागरकोइल में भी जारी रहेगा, जहां वे विशाल रैली में वोटरों से समर्थन मांगेंगे।
राहुल गांधी अब तक तमिलनाडु में चुनाव प्रचार में शामिल नहीं हुए हैं। इससे अटकलें बढ़ गई हैं कि कांग्रेस और DMK गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। विश्लेषक बताते हैं कि 2021 में राहुल गांधी ने जनवरी से ही राज्य में तीन दिवसीय दौरा कर प्रचार की शुरुआत कर दी थी।
हाल ही में पुडुचेरी में दोनों दलों के प्रचार कार्यक्रमों ने गठबंधन के अंदर दूरी को उजागर किया। राहुल गांधी ने अपनी सभा में DMK और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का नाम नहीं लिया, जबकि स्टालिन उसी दिन अलग समय पर वहां पहुंचे।
सीट बंटवारे की खींचतान का असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस दूरी का मुख्य कारण सीट बंटवारे और गठबंधन के भीतर मनमुटाव है। DMK सूत्रों के अनुसार, उनके पास राहुल और स्टालिन की मुलाकात कराना संभव नहीं हुआ।
DMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों की रैलियों का शेड्यूल पहले से तय था, और आखिरी समय में संयुक्त रैली संभव नहीं थी। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी बताते हैं कि राहुल गांधी 10 अप्रैल के बाद तमिलनाडु दौरे पर आ सकते हैं। इस तरह दोनों दलों के नेता जल्द ही एक साथ प्रचार में दिखाई दे सकते हैं।



