ममता बनर्जी की हार के सियासी तूफान के बीच एक मां की जीत, रत्ना देवनाथ बनीं बदलाव की नई आवाज

पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार ऐसा बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जिसने राज्य के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। जहां एक तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी ओर एक दर्द से उपजी उम्मीद ने चुनावी नतीजों में सबसे अलग पहचान बना ली। आरजी कर अस्पताल में अपनी बेटी को खोने वाली रत्ना देवनाथ ने न सिर्फ जीत दर्ज की, बल्कि जनता के बीच भावनात्मक बदलाव की एक मजबूत लहर भी खड़ी कर दी।
28 हजार से ज्यादा वोटों से जीत, टीएमसी प्रत्याशी को दी करारी शिकस्त
दक्षिण 24 परगना जिले में रत्ना देवनाथ ने तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी तीर्थंकर घोष को बड़े अंतर से हराया। करीब 28 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त के साथ उनकी जीत ने राजनीतिक हलकों में भी सबको चौंका दिया है। चुनाव प्रचार के दौरान जहां अन्य उम्मीदवार अपनी उपलब्धियों और राजनीतिक एजेंडे पर बात कर रहे थे, वहीं रत्ना देवनाथ अपनी बेटी की दर्दनाक मौत और न्याय की लड़ाई को जनता के सामने रखती नजर आईं।
घर की दहलीज से विधानसभा तक का सफर
रत्ना देवनाथ की कहानी सामान्य राजनीतिक सफर से बिल्कुल अलग है। 54 वर्षीय रत्ना देवनाथ गृहिणी जीवन से सीधे चुनावी राजनीति में आईं। उनके पति रंजन देवनाथ हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी संपत्ति लगभग 74 लाख रुपये बताई गई है। राजनीति में अनुभव न होने के बावजूद उन्होंने व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने का निर्णय लिया और महिलाओं की सुरक्षा को मुख्य मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान में उतर गईं।
आरजी कर कांड बना बदलाव की वजह
साल 2024 में आरजी कर अस्पताल में एक मेडिकल छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। इस घटना के बाद राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस पर लगातार सवाल उठे। न्याय में देरी और मामले से जुड़े आरोपों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। इसी पृष्ठभूमि में भारतीय जनता पार्टी ने महिला सुरक्षा को अपने प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में अपनाया और रत्ना देवनाथ को पानीहाट सीट से उम्मीदवार बनाया।
भावनात्मक कैंपेन और हाई-प्रोफाइल समर्थन
चुनावी प्रचार के दौरान रत्ना देवनाथ का दर्द और संघर्ष लोगों के बीच गहरी भावनात्मक छाप छोड़ गया। उनके समर्थन में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी नामांकन के समय मौजूद रहीं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को पानीहाट में उनके समर्थन में रैली की। इन बड़े राजनीतिक चेहरों की मौजूदगी ने उनके अभियान को और मजबूती दी।
ममता बनर्जी को सीधी चुनौती
रत्ना देवनाथ ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनकी राजनीतिक लड़ाई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से है, क्योंकि उनकी बेटी स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थी और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत ही यह घटना हुई। उन्होंने लगातार यह मुद्दा उठाया कि जिस राज्य में महिलाओं को न्याय नहीं मिलता, वहां आवाज उठाना जरूरी है।
बंगाल में बड़ा सियासी बदलाव
इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 293 में से 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 2 और लेफ्ट फ्रंट को भी 2 सीटें मिली हैं। सबसे बड़ा राजनीतिक झटका मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगा, जो अपनी पारंपरिक भवानीपुर सीट भी नहीं बचा सकीं।



