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RBI का बड़ा फैसला: 1 जुलाई 2026 से बदल जाएगा EMI सिस्टम, आपदा में अब बैंक खुद देगा राहत; ग्राहकों को नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करते हुए लोन ग्राहकों को राहत देने वाला नया नियम लागू करने का ऐलान किया है। 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाले इस फैसले के तहत होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों के लिए EMI से जुड़े नियम पूरी तरह बदल जाएंगे।

आपदा में अब बैंक खुद देगा राहत

RBI के नए नियम के मुताबिक, प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप या अन्य संकट की स्थिति में अब ग्राहकों को राहत पाने के लिए बैंक के चक्कर नहीं लगाने होंगे। बैंक खुद आगे बढ़कर यह तय करेंगे कि किन ग्राहकों को राहत दी जानी चाहिए और उनके लोन पर क्या कदम उठाने हैं।

EMI टालने से लेकर अवधि बढ़ाने तक की सुविधा

नई व्यवस्था के तहत बैंक अपनी तरफ से EMI को टालने, लोन की अवधि बढ़ाने या कुछ शुल्क माफ करने जैसे फैसले ले सकेंगे। हालांकि, यदि कोई ग्राहक यह राहत नहीं लेना चाहता, तो उसके पास 135 दिनों के भीतर इस सुविधा को अस्वीकार करने का विकल्प भी होगा।

किन ग्राहकों को मिलेगा फायदा

यह राहत हर लोन धारक को नहीं मिलेगी। इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। लाभ उन्हीं ग्राहकों को मिलेगा जिनका लोन खाता ‘स्टैंडर्ड अकाउंट’ की श्रेणी में होगा और जिनकी कोई किस्त 30 दिन से ज्यादा बकाया नहीं है। इसके अलावा, यदि आपदा के कारण किसी का लोन NPA में बदल जाता है, तो इस योजना के तहत उसे फिर से सामान्य स्थिति में लाने का मौका मिलेगा।

आपदा के समय बैंकों की नई जिम्मेदारियां

RBI ने बैंकों की भूमिका को भी बड़ा कर दिया है। अब आपदा के समय बैंक केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि प्रभावित इलाकों में सक्रिय रूप से काम करेंगे। मोबाइल बैंकिंग वैन, राहत कैंप और नकद वितरण जैसी सुविधाएं बैंक को उपलब्ध करानी होंगी। साथ ही, एटीएम को तुरंत चालू रखना और नकदी की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी होगी।

लोन शर्तों और फीस में राहत

नई गाइडलाइन के अनुसार, बैंक आपदा के समय लोन शर्तों को आसान बना सकेंगे। जरूरत पड़ने पर फीस और अतिरिक्त चार्ज को 1 साल तक के लिए माफ या कम किया जा सकता है। इसके साथ ही बैंकों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे रीस्ट्रक्चर किए गए लोन के लिए 5% अतिरिक्त प्रावधान सुरक्षित रखें, ताकि जोखिम को नियंत्रित किया जा सके।

RBI ने क्यों लिया यह फैसला

RBI का कहना है कि आपदा की स्थिति में लोग पहले से ही आर्थिक और मानसिक दबाव में होते हैं। ऐसे में बैंकिंग प्रक्रियाओं के लिए उन्हें बार-बार शाखाओं के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। इस नए नियम का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम को अधिक मानवीय, तेज और आसान बनाना है, ताकि जरूरत के समय लोगों को तुरंत वित्तीय सहायता मिल सके।

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