
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। NDA सरकार के लंबे समय से प्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार की तारीख तय कर दी गई है। यह विस्तार 7 मई को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में होने जा रहा है। इसे केवल एक शपथ ग्रहण समारोह नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
गांधी मैदान में होगा शपथ ग्रहण समारोह
सूत्रों के अनुसार, नए मंत्रियों को राज्यपाल सैयद अता हसनैन पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। पूरे कार्यक्रम को भव्य बनाने की तैयारी की जा रही है, जिसमें एनडीए की एकजुटता और राजनीतिक ताकत का संदेश देने की रणनीति साफ दिखाई दे रही है।
अमित शाह की बैठक के बाद फाइनल हुई सूची
कैबिनेट विस्तार को लेकर भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई अहम बैठक के बाद ही मंत्रियों की अंतिम सूची को मंजूरी दी गई। इस प्रक्रिया में एनडीए के प्रमुख सहयोगी दलों—ललन सिंह, जीतन राम मांझी और चिराग पासवान—से भी चर्चा की गई।
नीतीश कुमार से सम्राट चौधरी की मुलाकात
इस राजनीतिक हलचल के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से भी मुलाकात की। इस मुलाकात को गठबंधन के भीतर समन्वय और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम विपक्ष के नैरेटिव को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है।
गठबंधन में संतुलन साधने की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालयों का बंटवारा एनडीए के सभी सहयोगी दलों—भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा—के बीच संतुलन बनाकर किया जाएगा। इसमें जातीय समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और अनुभव तथा नए चेहरों का संतुलन प्रमुख आधार रहेगा।
राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा विस्तार
बिहार का यह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि आगामी चुनावी रणनीति से जुड़ा अहम कदम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसके जरिए एनडीए राज्य में अपनी पकड़ को और मजबूत करने और भविष्य की चुनावी दिशा तय करने की कोशिश कर रहा है।
वर्तमान मंत्रिमंडल की स्थिति
फिलहाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास 29 मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी 10 मंत्रालय संभाल रहे हैं, जबकि दूसरे उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास 8 मंत्रालयों का कार्यभार है।



