मध्य प्रदेश

MP में पंचायत से जिला स्तर तक बंपर नियुक्तियों का रास्ता साफ, 50 से ज्यादा समितियों में ढाई लाख लोगों को मिलेगा मौका, मोहन सरकार का बड़ा फैसला

भोपाल। मध्यप्रदेश में प्रशासनिक ढांचे में बड़ा विस्तार करते हुए सरकार ने पंचायत और जिला स्तर पर समितियों में व्यापक नियुक्तियों का रास्ता खोल दिया है। आयोग, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्तियों के बाद अब राज्य सरकार ने 31 विभागों की 50 से अधिक समितियों में अशासकीय सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। इस कदम से करीब ढाई लाख लोगों को प्रशासनिक व्यवस्था में भागीदारी का अवसर मिलेगा।

15 दिन में पूरी होगी नियुक्ति प्रक्रिया

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि संबंधित समितियों में नियुक्तियों की प्रक्रिया 15 दिनों के भीतर पूरी की जाए। जिन समितियों के निर्णय राज्य स्तर पर लिए जाने हैं, उनके प्रस्ताव शीघ्र भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि सभी समितियां जल्द से जल्द सक्रिय हो सकें।

पंचायत से जिला स्तर तक बढ़ेगी भागीदारी

नई व्यवस्था के तहत पंचायत और जिला स्तर पर दीनदयाल अंत्योदय समितियों का गठन किया जाएगा। पंचायत स्तर पर समितियों में 5 से 11 सदस्य होंगे, जबकि जिला स्तर पर 25 से 30 सदस्यों को शामिल किया जाएगा। इसी तरह जिला योजना समितियों में भी 25 से अधिक सदस्य रखे जाएंगे।

सरकार का अनुमान है कि इस व्यवस्था से लगभग ढाई लाख अशासकीय व्यक्तियों को शासन व्यवस्था में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर मिलेगा।

इन प्रमुख समितियों में होगी नियुक्तियां

सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए कई महत्वपूर्ण समितियों में नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें रोगी कल्याण समिति, विद्युत सलाहकार समिति, टीबी फोरम, बाल संरक्षण समिति, जिला मूल्यांकन समिति, युवा ग्राम शक्ति, वाटरशेड समिति, प्रधानमंत्री आवास योजना अपीलीय समिति, गोशाला परियोजना समन्वय समिति, कौशल विकास समिति, अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण निगरानी समिति, कृषि सिंचाई योजना, लघु उद्योग संवर्धन, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, जल एवं स्वच्छता समिति, खनिज निधि सहित कई अन्य समितियां शामिल हैं।

जिला पुलिस शिकायत बोर्ड का होगा गठन

प्रदेश में पुलिस व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए जिला पुलिस शिकायत बोर्ड का गठन भी किया जाएगा। यह बोर्ड पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिरासत में यातना, कस्टडी में मौत, दुष्कर्म, गंभीर चोट, अवैध गिरफ्तारी या जबरन वसूली जैसे मामलों की जांच करेगा।

यह बोर्ड किसी भी नागरिक की शिकायत पर या स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर सकेगा। यह मुख्य रूप से उप पुलिस अधीक्षक स्तर से नीचे के अधिकारियों के मामलों की जांच करेगा और दोषी पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश सरकार को भेजेगा।

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