
हरियाणा सरकार ने दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए पूरे राज्य में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया है। सरकार ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर लोगों को दहेज के खिलाफ जागरूक किया जाए। इस अभियान में हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण का भी सहयोग लिया जाएगा।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी उपायुक्तों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि दहेज मांगने और देने दोनों को समाज में अपराध के रूप में देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य समाज में दहेज के खिलाफ मजबूत जनमत तैयार करना और लोगों को यह बताना है कि दहेज लेना-देना कानूनन दंडनीय अपराध है।
उच्च स्तरीय बैठक में हुई कानून के क्रियान्वयन की समीक्षा
मुख्य सचिव ने चंडीगढ़ में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की। बैठक में गृह विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्देश का भी उल्लेख किया गया, जिसमें राज्यों को दहेज निषेध कानूनों के प्रभावी पालन, दहेज निषेध अधिकारियों की नियुक्ति और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए गए थे।
राज्य के सभी SDM होंगे दहेज निषेध अधिकारी
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बताया कि अक्टूबर 2015 में जारी अधिसूचना के तहत राज्य के सभी सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) को दहेज निषेध अधिकारी नामित किया जा चुका है। उन्होंने निर्देश दिए कि ये अधिकारी शिकायतों के निपटारे, जागरूकता अभियान और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय में सक्रिय भूमिका निभाएं।
सरकार ने यह भी कहा है कि दहेज निषेध अधिकारियों के नाम, संपर्क नंबर और आधिकारिक ईमेल आईडी जिला और उपमंडल स्तर पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाएं, ताकि पीड़ित परिवार आसानी से संपर्क कर सकें।
दहेज मामलों की गंभीरता से जांच के निर्देश
बैठक में दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या से जुड़े मामलों की जांच को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी और 498-ए से जुड़े मामलों की शुरुआती स्तर से गंभीरता से जांच होनी चाहिए, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
उन्होंने पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया।
17 हजार जागरूकता शिविर पहले ही आयोजित
महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव शेखर विद्यार्थी ने बताया कि दहेज निषेध अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए गुरुग्राम स्थित हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (HIPA) को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रशिक्षण में कानूनी प्रावधान, पुलिस समन्वय, पीड़ित सहायता और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जैसे विषय शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से प्रदेशभर में करीब 17 हजार जागरूकता शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। आंगनवाड़ी नेटवर्क और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर लोगों को दहेज प्रथा के सामाजिक और कानूनी दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
धार्मिक और सामाजिक संगठनों से भी सहयोग की अपील
सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं, धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज समूहों से भी दहेज मुक्त हरियाणा अभियान में सहयोग की अपील की है। सरकार का कहना है कि समाज में समानता, सम्मान और गरिमा आधारित विवाह संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है।
साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि दहेज से जुड़ी किसी भी तरह की प्रताड़ना, धमकी या अवैध मांग की सूचना तुरंत प्रशासन, पुलिस या महिला एवं बाल विकास विभाग को दें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



