पंजाब

सोना खरीद और विदेशी यात्राएं घटाने की अपील पर उद्योग जगत में नाराजगी, पंजाब के कारोबारियों ने जताई चिंता

चंडीगढ़: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नागरिकों से सोने की खरीद कम करने, विदेशी यात्राओं को सीमित रखने और बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों के बीच वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की अपील पर अब उद्योग जगत से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। पंजाब के उद्योगपतियों ने इस बयान पर चिंता जताते हुए कहा है कि इसका असर कई बड़े रोजगार आधारित क्षेत्रों पर पड़ सकता है।

वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने प्रधानमंत्री की अपील पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। फोरम के अध्यक्ष बदीश जिंदल ने कहा कि देश के सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से इस तरह के बयान जेम्स एंड ज्वेलरी, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, एविएशन और रिटेल जैसे सेक्टरों में अनावश्यक भय और असमंजस का माहौल पैदा कर सकते हैं। उनका कहना है कि ये सभी क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराते हैं और उपभोक्ता खर्च पर निर्भर रहते हैं।

‘घरेलू खर्च रोकने के बजाय चीनी आयात पर लगे रोक’

बदीश जिंदल ने कहा कि सरकार को घरेलू खर्च को हतोत्साहित करने के बजाय गैर-जरूरी और सस्ते चीनी उत्पादों के बढ़ते आयात पर नियंत्रण करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ऐसे आयात की वजह से देश से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जा रही है, जिसका असर घरेलू उद्योगों पर पड़ रहा है।

फोरम के मुताबिक, देश का जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है। यह उद्योग देश की जीडीपी में लगभग 7 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है।

50 लाख लोगों की आजीविका जुड़ी

फोरम ने कहा कि जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 50 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। ऐसे में सोने की खरीद को लेकर नकारात्मक संदेश बाजार और उपभोक्ताओं दोनों को प्रभावित कर सकता है।

इसी तरह पर्यटन और यात्रा उद्योग को भी भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बताते हुए फोरम ने कहा कि यह क्षेत्र देश की जीडीपी में 7 से 8 प्रतिशत तक योगदान देता है और करोड़ों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। उद्योग संगठनों का मानना है कि यात्रा को हतोत्साहित करने वाले बयान कारोबारी गतिविधियों और उपभोक्ता विश्वास को कमजोर कर सकते हैं।

‘भारतीय परिवारों के लिए सुरक्षित निवेश है सोना’

बदीश जिंदल ने कहा कि भारतीय समाज में सोने को पारंपरिक रूप से सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। महंगाई, बाजार में अस्थिरता और रुपये की कमजोरी जैसी परिस्थितियों में मध्यम वर्ग और कारोबारी परिवार सोने को आर्थिक सुरक्षा के तौर पर देखते हैं।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से सोने की खरीद कम करने की अपील से देश की आर्थिक स्थिति और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर नकारात्मक संदेश जा सकता है, जिसका असर निवेशकों की धारणा पर भी पड़ सकता है।

रुपये की कमजोरी से बढ़ रहा एमएसएमई पर दबाव

वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने यह भी कहा कि भारतीय रुपये में लगातार कमजोरी आने से एमएसएमई क्षेत्र की लागत और आयात बिल तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में घरेलू उद्योग पहले से ही दबाव में हैं।

फोरम ने सरकार से मांग की कि घरेलू उद्योगों को प्रभावित करने वाले सस्ते चीनी उत्पादों के आयात पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए। साथ ही गैर-जरूरी आयात पर उच्च शुल्क और मात्रात्मक प्रतिबंध लागू कर स्थानीय विनिर्माण और एमएसएमई सेक्टर को अधिक संरक्षण दिया जाए।

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